5 किमी का सफर बना जानलेवा

आजादी के दशकों बाद भी सडक़ को तरस रहे बैगा बाहुल्य क्षेत्र के ग्रामीण

  • 5 किमी का सफर बना जानलेवा
  • 5 साल पहले मिली स्वीकृति, पर धरातल पर सडक़ गायब
  • अधिकारियों के साथ पैदल चलकर विधायक ने जानी हकीकत

मंडला महावीर न्यूज 29. विकासखंड घुघरी के अंतर्गत आने वाले बैगा बाहुल क्षेत्र के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टिकराचलनी से पद्दीकोना तक का लगभग पाँच किलोमीटर लंबा मार्ग पिछले कई वर्षों से अत्यंत जर्जर स्थिति में है। मार्ग की हालत इतनी खस्ता है कि यहाँ पैदल चलना भी दूभर हो गया है, जिससे ग्रामीणों को वर्षों से उपेक्षा का दंश झेलना पड़ रहा है।खराब सडक़ के कारण इस क्षेत्र में एम्बुलेंस का पहुँचना लगभग असंभव है। स्थिति इतनी विकट है कि गंभीर बीमारी या प्रसव के दौरान मरीजों को अक्सर खाट या कंधे पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की लापरवाही के कारण वे आज भी आदिम युग जैसी परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।

कागजों में अटकी 5 वर्ष पुरानी स्वीकृति 

बताया गया कि इस मार्ग पर ग्रेवल सडक़ निर्माण के लिए करीब पांच वर्ष पूर्व ही प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी थी। हैरानी की बात यह है कि स्वीकृति के बावजूद आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

विधायक ने पैदल तय किया 5 किमी का सफर 

ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद क्षेत्रीय विधायक नारायण सिंह पट्टा ने मामले को गंभीरता से लिया है। हाल ही में विधायक नारायण सिंह पट्टा ने ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों एवं इंजीनियरों के साथ इस दुर्गम मार्ग पर पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा की। उन्होंने स्वयं पथरीले और जर्जर रास्ते की जमीनी हकीकत देखी और ग्रामीणों से संवाद किया।

जल्द निर्माण का आश्वासन 

मौके पर उपस्थित अधिकारियों ने विधायक और ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि सडक़ निर्माण की बाधाओं को दूर कर शीघ्र ही नए सिरे से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि यह आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है और कब इन ग्रामीणों को बदहाल सडक़ से मुक्ति मिलती है।



 

Leave a Comment