पोषक ग्राम तरवानी में विकास कार्यों पर ताला

पोषक ग्राम तरवानी में विकास कार्यों पर ताला

  • 5 साल से खड़े मोबाइल टावर पर नेटवर्क नहीं, अंधेरे में भविष्य
  • ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई विकास की गुहार
  • जर्जर सड़क, अधूरा आंगनवाड़ी भवन और सिंचाई के अभाव में दम तोड़ रहा गांव
  • आजादी के दशकों बाद भी सुविधाओं को तरस रहा पोषक ग्राम तरवानी

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में आज भी ऐसे सैकेड़ों गांव, कस्बा, टोला है, जो विकास से कोसो दूर है। जहां ग्रामीण बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे है। संबंधित विभाग और अधिकारी आंखे बंद करके सब देख रहा है। अंतिम छोर के व्यक्तियों को शासकीय योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस डिजिटल इंडिया के दौर में मंडला जिले की ग्राम पंचायत डोभी का ग्राम तरवानी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। गांव की बदहाली और प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर समस्त ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर पांच मुख्य समस्याओं के त्वरित निराकरण की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत को बार-बार अवगत कराने के बावजूद उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

जानकारी अनुसार विकासखंड नारायणगंज की ग्राम पंचायत डोभी के पोषक ग्राम तरवानी के ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुँचकर कलेक्टर को ग्राम में व्याप्त समस्या से अवगत कराते हुए कहां कि बार-बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद ग्राम पंचायत के जिम्मेदार द्वारा उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे पूरा गाँव उपेक्षित महसूस कर रहा है। जल्द से जल्द गांव की समस्या का समाधान किया जाए, जिससे यहां के ग्रामीणों को इस परेशानी से निजात मिल सके।

डिजिटल दौर में भी नेटवर्क से वंचित ग्रामीण 

ग्रामीणों ने बताया कि गाँव में जियो और बीएसएनएल के मोबाइल टावर पिछले 5-8 वर्षों से स्थापित हैं, लेकिन आज तक चालू नहीं किए गए। इसके कारण ग्रामीण न तो अपना केवाईसी करा पा रहे हैं और न ही बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रहे हैं। डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी यहाँ के निवासी सूचना क्रांति से कटे हुए हैं।

अधूरा भवन से शिक्षा पर संकट 

गांव में वर्ष 2022 से स्वीकृत आंगनबाड़ी भवन आज भी अर्धनिर्मित अवस्था में पड़ा है, जिससे छोटे बच्चे इस महत्वपूर्ण सरकारी सुविधा से वंचित हैं। इसके साथ ही मिडिल स्कूल जाने के लिए बच्चों को गांव से लगभग 3-4 किलोमीटर दूर डोभी जाना पड़ता है। रास्ता कच्चा, ऊबड़-खाबड़ और जंगली क्षेत्र से होकर गुजरता है, जहाँ हमेशा हिंसक पशुओं का डर बना रहता है। बारिश के दिनों में यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

खेती और बिजली भी बदहाल 

गांव की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, लेकिन सिंचाई का कोई पुख्ता साधन नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग की भूमि पर एक बड़ा डैम बनाया जाए जिससे पेयजल और सिंचाई की समस्या हल हो सके। इसके साथ ही ग्रामीणों ने बिजली की समस्या को लेकर बताया कि गांव में बिजली की अधिक खपत के कारण दूसरा ट्रांसफार्मर लगाया तो गया है, लेकिन उसे अभी तक चालू नहीं किया गया, जिससे गांव में अंधेरा छाया रहता है और सिंचाई व्यवस्था ठप्प पड़ी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र ही समस्या का निराकरण किया जाए। समस्या का समाधान न होने पर ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बताते हुए शासन-प्रशासन से शीघ्र निराकरण की मांग की है।

इनका कहना है

हमारे गांव में वर्षों से मोबाइल टावर खड़े हैं, लेकिन वे सिर्फ शो-पीस बनकर रह गए हैं। आज के डिजिटल युग में भी हमारे बच्चे पढ़ाई के लिए नेटवर्क को तरस रहे हैं और ग्रामीणों का कोई भी ऑनलाइन काम नहीं हो पाता।


संजय कुमार सरोते

शिक्षा की हालत यह है कि बच्चों को कच्ची और पथरीली सड़क से स्कूल जाना पड़ता है। रास्ते में जंगल पड़ता है जहाँ हमेशा जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। बारिश में तो बच्चों का स्कूल जाना लगभग बंद ही हो जाता है।


सुब्बे सिंह उईके

गांव में बिजली की खपत ज्यादा है, इसलिए दूसरा ट्रांसफार्मर लगाया गया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उसे चालू नहीं किया गया। इससे न तो घर में रोशनी रहती है और न ही हम खेतों में सिंचाई कर पा रहे हैं।


रामकरण मरावी

खेती ही हमारे जीवन का आधार है, लेकिन सिंचाई का कोई साधन नहीं है। हमने कलेक्टर साहब से मांग की है कि गाँव की पूर्व दिशा में जो वन विभाग की भूमि है, वहाँ डैम बनाया जाए ताकि हमें साल भर पानी मिल सके।


चैन सिंह बरकडे



 

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