श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह, फूलों की वर्षा के बीच गूँजे मंगल गीत

जिलेहटा में धूमधाम से रचाया गया, श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह, फूलों की वर्षा के बीच गूँजे मंगल गीत

  • भागवत कथा में पहुँचे जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय संगठन मंत्री महंत भगतगिरि महाराज
  • भजनों की धुन पर झूमे श्रद्धालु

मंडला महावीर न्यूज 29. निवास क्षेत्र के ग्राम जिलेहटा में प्रवाहित हो रही संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठवें दिन बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह का प्रसंग अत्यंत हर्षोल्लास के साथ सुनाया गया। कथा व्यास आचार्य उदय प्रकाश पाण्डेय नदावन कटनी वाले ने जब विवाह का प्रसंग छेड़ा, तो पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी का वेश धारण किए बाल कलाकारों की मनमोहक झांकी सजाई गई। जैसे ही विवाह की रस्में शुरू हुईं, श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाते हुए प्रभु पर जमकर पुष्पवर्षा की। आचार्य जी ने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि माता रुक्मणी साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थीं। उन्होंने मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार कर लिया था, लेकिन उनके भाई रुक्मी के विरोध के कारण भगवान को युद्ध में शिशुपाल और जरासंध जैसे राजाओं को परास्त कर रुक्मणी जी का वरण करना पड़ा।

अंतर्राष्ट्रीय महंत का हुआ स्वागत 

बुधवार की कथा में एक विशेष आध्यात्मिक गौरव तब जुड़ा, जब अमोलखोह आश्रम के महंत एवं जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री 1008 भगतगिरि बच्चू महाराज का कथा स्थल पर आगमन हुआ। आयोजन समिति और श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजे, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। महंत जी ने अपने आशीर्वचन में उपस्थित जनसमूह को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

आज होगा सुदामा चरित्र और कथा विश्राम 

आचार्य उदय प्रकाश पाण्डेय ने श्रद्धालुओं को बताया कि गुरुवार को कथा का अंतिम दिन है। इस दिन मित्रता के अनूठे प्रतीक सुदामा चरित्र का वर्णन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के अंतिम दिन सम्मिलित होने से संपूर्ण कथा श्रवण का पुण्य फल प्राप्त होता है। समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर कथा विश्राम और सुदामा चरित्र प्रसंग का लाभ लेने की अपील की है। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, आयोजन समिति के सदस्य और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



 

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