पिता की आज्ञा और भक्ति के संगम थे कर्दम ऋषि, जिलहटा में गूंजी भगवान की महिमा
- गृहस्थाश्रम में प्रवेश से पहले मुक्ति का मार्ग जानना जरूरी- पं. उदय प्रकाश पांडेय
मंडला महावीर न्यूज 29. क्षेत्र के ग्राम जिलहटा में श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के द्वितीय दिवस पर कटनी नदावन से आए कथावाचक पं. उदय प्रकाश पांडेय ने कर्दम ऋषि के आदर्श चरित्र और उनकी ईश्वर भक्ति का मार्मिक वर्णन किया।
कथावाचक पं. उदय प्रकाश पांडेय ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि ब्रह्मा जी के पुत्र कर्दम ऋषि जन्मजात विरक्त और भगवान के परम प्रेमी थे। जब ब्रह्मा जी ने उन्हें सृष्टि विस्तार हेतु गृहस्थाश्रम में प्रवेश की आज्ञा दी, तब उन्होंने पिता की आज्ञा और अपने वैराग्य के बीच संतुलन बनाने के लिए सरस्वती नदी के तट पर कठोर तपस्या की। कथा वाचक ने श्रद्धालुओं को सीख देते हुए कहा गृहस्थाश्रम के झंझटों में फंसने से पहले व्यक्ति को उससे बाहर निकलने का मार्ग सीख लेना चाहिए।
भगवान का प्राकट्य और कर्दम जी की स्तुति
कथा में बताया गया कि कर्दम जी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु शंख, चक्र और गदा धारण कर प्रकट हुए। कर्दम ऋषि ने प्रभु की स्तुति करते हुए कहा कि ईश्वर को पाकर भी यदि कोई सांसारिक वस्तु मांगता है, तो वह माया द्वारा ठगा गया है। उन्होंने प्रभु से ऐसी पत्नी की कामना की जो उनके गृहस्थाश्रम के साथ-साथ साधना में भी सहायक बने।
आगामी कार्यक्रम
कथा के समापन पर यज्ञाचार्य रमाकांत शास्त्री ने आरती संपन्न कराई। उन्होंने श्रद्धालुओं को जानकारी दी कि कथा के तीसरे दिन कपिलोख्यान भगवान कपिल का अवतार का विशेष प्रसंग सुनाया जाएगा। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में ग्रामवासी और क्षेत्र के श्रद्धालु उपस्थित रहे।









