विलुप्त होते प्राचीन पथो को पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ बढ़ रहे दादू राम महाराज

विलुप्त होते प्राचीन पथो को पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ बढ़ रहे दादू राम महाराज

  • सड़कों पर नहीं, नर्मदा के तटों पर तपस्या, नर्मदा परिक्रमा टूर नहीं साधना है
  • दादू राम महाराज की रियल नर्मदा परिक्रमा पहुंची बीजाडांडी

मंडला महावीर न्यूज 29. आज के आधुनिक युग में जहाँ नर्मदा परिक्रमा सड़कों और वाहनों के माध्यम से एक टूर बनती जा रही है, वहीं दादू राम सत्य राम महाराज की नर्मदा परिक्रमा एक कठिन साधना और तपस्या की मिसाल पेश कर रही है। महाराज जी की यह यात्रा सड़कों के किलोमीटर नापने के बजाय पूर्णत: माँ नर्मदा के तटों पर चलकर रियल परिक्रमा के रूप में सामने आ रही है।

परिक्रमा मार्ग को पुनर्जीवित करने की पहल 

मंडला जिले में पहुँचने पर महाराज जी ने अनुभव किया कि बरगी बांध के भराव और डूब क्षेत्र के कारण माँ नर्मदा के प्राचीन पद-चिह्न (परिक्रमा पथ) लगभग मिट चुके हैं। मार्ग का ज्ञान न होने के कारण अधिकांश श्रद्धालु हाईवे से ही परिक्रमा कर लौट जाते हैं। इस प्राचीन मार्ग को जीवित करने के लिए दादू राम सत्य राम महाराज श्रद्धालुओं के सहयोग से जहाँ संभव हो, वहाँ पथ-चिह्नों का निर्माण कर रहे हैं। इसके साथ ही वे तटों पर बरगद व पीपल के पौधे लगाकर और पत्थरों पर शिव निर्माण कर माँ नर्मदा की महिमा को पुन: प्रतिष्ठित कर रहे हैं।

नदी नहीं, शक्ति और संस्कृति की जननी है नर्मदा 

महाराज जी का संदेश है कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आदिम सभ्यता और संस्कृति की जननी है। उन्होंने कहा कि कोस-कोस पर दिव्य आत्माओं का स्थान है, जिनकी सेवा और आशीर्वाद से आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। महाराज जी ने कहां कि नर्मदा सेवा और छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन ही वास्तविक पुण्य फल है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

स्वच्छता और संरक्षण का दिया संदेश 

मानव जाति को जागरूक करते हुए दादू राम सत्य राम महाराज लोगों से अपील की है कि आने वाली पीढिय़ों के लिए माँ नर्मदा को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने भक्तों से माँ नर्मदा में स्नान के दौरान साबुन का प्रयोग न करने और तटों पर पॉलीथीन या कचरा न फैलाने का आह्वान किया है। दादू राम सत्य राम महाराज की यह आध्यात्मिक यात्रा वर्तमान में विकासखंड बीजाडांडी के ग्राम पिपरिया पहुंच चुकी है। यहाँ से यह यात्रा नर्मदा के किनारे-किनारे पिंडरई पाठा होते हुए विकासखंड नारायणगंज की ओर आगे बढ़ेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को माँ नर्मदा की महाशक्ति से जोडऩा और उनके संरक्षण के प्रति सजग करना है।



 

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