मां नर्मदा साक्षात सिद्धिदात्री, जिनके तट पर विराजे हैं 60 करोड़ से अधिक तीर्थ-पं. दिवाकर शास्त्री
ग्राम सागर में नर्मदा पुराण में कुबेर भंडारी और इंद्रेश्वर महादेव के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर
मंडला महावीर न्यूज 29. ग्राम सागर में आयोजित नर्मदा पुराण में इन दिनों आस्था का जनसैलाब उमड़ रहा है। बुधवार को कथा के दौरान मां नर्मदा की महिमा और उनके तटों पर स्थित दुर्लभ तीर्थों के रहस्यों से पर्दा उठा। कथा व्यास पंडित दिवाकर शास्त्री ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि मां नर्मदा साक्षात सिद्धिदात्री हैं। उन्होंने बताया कि नर्मदा तट पर किया गया दान और पूजन अनंत पुण्य फलदायी होता है। पंडित दिवाकर शास्त्री ने बताया कि स्वयं देवी-देवता भी मां नर्मदा की शरण में रहते हैं और उनकी महिमा का वर्णन शब्दों में करना असंभव है।
कथा के दौरान शास्त्री जी ने बताया कि किस प्रकार एक दीप प्रज्वलन के पुण्य से कुबेर को धन का देवता बनने का सौभाग्य मिला। कुबेर ने नर्मदा तट पर कुबेर भंडारी तीर्थ की स्थापना की थी। उन्होंने इंद्र से जुड़ी कथा का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि स्वर्ग के राज्य पद पर सदा बने रहने की कामना से इंद्र ने मां नर्मदा के पावन तट पर जबलपुर स्थित लम्हेता घाट में इंद्रेश्वर महादेव की स्थापना की, जिससे भगवान शंकर प्रसन्न हुए और इंद्र को सदा स्वर्गाधिपति बने रहने का वरदान प्रदान किया। आज भी उस घाट पर इंद्र के ऐरावत हाथी के पदचिन्ह विद्यमान हैं।
तीर्थों का अनूठा महत्व
कथा व्यास पंडित दिवाकर शास्त्री ने बुद्ध घाट की महिमा बताते हुए कहा कि यहाँ शिव पूजन से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और भक्तों को आरोग्य एवं शांति की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि मां नर्मदा के तट पर 60 करोड़ 67 लाख 313 तीर्थ विद्यमान हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर दिखाई दिए और मां नर्मदा के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। नर्मदा पुराण आयोजन ग्राम सागर में आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। आयोजकों ने क्षेत्रीय जनता से अपील की है की अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लें।










