ध्रुव चरित्र वर्णन से भक्ति और दृढ़ संकल्प की दी सीख

ध्रुव चरित्र वर्णन से भक्ति और दृढ़ संकल्प की दी सीख

  • भक्ति के रंग में रंगा ग्राम देवरी, उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
  • कथा व्यास पं. कृष्णगोपाल पाण्डेय ने कर रहे श्रीमद् भागवत कथा का वाचन

मंडला महावीर न्यूज 29. ग्राम देवरी में इन दिनों अध्यात्म और भक्ति की अविरल धारा बह रही है। महिला मंडल एवं समस्त ग्रामवासियों के सामूहिक सहयोग से श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। नौ दिवसीय इस आध्यात्मिक महोत्सव के कारण पूरा गांव और आसपास का क्षेत्र श्री हरि के जयकारों से गुंजायमान है।बताया गया कि श्रीमद् भागवत कथा 12 जनवरी तक चलेगा। कथा में प्रतिदिन प्रात: 8 से 11.30 बजे तक विधि-विधान से पूजन-पाठ और अनुष्ठान किया जा रहा है। इसके बाद दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्य कथा का संगीतमय वाचन कथा व्यास सामवेदीय पंडित कृष्णगोपाल पाण्डेय बाबा देवरी द्वारा किया जा रहा है। पंडित कृष्णगोपाल पाण्डेय ने कथा दूसरे दिन श्रीमद् भागवत की महिमा पर प्रकाश डालते हुए धु्रव के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उनके ओजस्वी मुखारविंद से कथा का श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर एकत्रित हो रहे हैं।

ध्रुव प्रसंग-अटूट भक्ति का संदेश 

कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित कृष्णगोपाल पाण्डेय ने भागवत महापुराण की महिमा बताते हुए ध्रुव चरित्र के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक बालक ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन तपस्या से भगवान नारायण को प्रसन्न कर लिया। आगे बताया कि महाराज उत्तानपाद के पुत्र धु्रव को जब उनकी सौतेली मां सुरुचि ने पिता की गोद से उतार दिया और कटु वचन कहे, तो बालक धु्रव अत्यंत व्यथित हुए। माता सुनीति के कहने पर बालक धु्रव वन की ओर प्रस्थान कर गए, जहां देवर्षि नारद ने उन्हें नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की दीक्षा दी। मात्र 5 वर्ष की अल्पायु में धु्रव ने यमुना तट पर स्थित मधुवन में कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें ब्रह्मांड में धु्रव तारा के रूप में अचल स्थान प्रदान किया।

दृढ़ संकल्प से कठिन लक्ष्य भी कर सकते प्राप्त 

कथा व्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को समझाया कि यदि मनुष्य का संकल्प दृढ़ हो और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास हो, तो वह कठिन से कठिन लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। पंडित कृष्णगोपाल पाण्डेय के ओजस्वी मुखारविंद से कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु कथा स्थल पर एकत्रित हो रहे हैं। कथा दूसरे दिन की कथा के समापन में भव्य आरती की गई।


 

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