ज्ञापन नहीं, अब आंदोलन होगा, मंडला के रेलवे हक के लिए निर्णायक लड़ाई का शंखनाद

ज्ञापन नहीं, अब आंदोलन होगा, मंडला के रेलवे हक के लिए निर्णायक लड़ाई का शंखनाद

  • रेल्वे संघर्ष समिति का अल्टीमेटम, वर्षों की उपेक्षा से आक्रोशित जनता
  • कोचिंग डिपो और नई रेल लाइनों की मांग को लेकर थमेगा पहिया

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के साथ रेलवे सुविधाओं के मामले में वर्षों से किए जा रहे सौतेले व्यवहार के खिलाफ अब जनता का सब्र टूट गया है। रेलवे संघर्ष समिति और जिले के नागरिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ज्ञापनों और आश्वासनों का दौर समाप्त हो चुका है और मंडला के रेल अधिकारों के लिए अब निर्णायक जन-आंदोलन शुरू होगा।समिति के सदस्यों ने कहां कि कोचिंग डिपो, नई ट्रेनों और रेल लाइनों को लेकर दर्जनों बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन प्रशासन और रेल मंत्रालय ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। आदिवासी बाहुल्य पर्यटन और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बावजूद मंडला को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे छात्रों, व्यापारियों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जन-आंदोलन की प्रमुख मांगे 

आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार और रेलवे विभाग के समक्ष अपनी मांगें रखी हैं, जिन पर वे तुरंत कार्रवाई करने की मांग कर रहे है। मांग में मंडला फोर्ट स्टेशन में कोचिंग डिपो और पिट लाइन के निर्माण की तत्काल घोषणा और समय-सीमा निर्धारित की जाए। पूर्व में सर्वे हो चुकी रेल लाइनों बिलासपुर-मंडला-जबलपुर एवं गौरेला पेंड्रा-शहडोल-डिंडोरी-मंडला-गोटेगांव) के लिए केंद्रीय बजट में राशि आवंटित की जाए। मंडला से प्रमुख शहरों के लिए नई लंबी दूरी की ट्रेनें जल्द शुरू की जाएं।

सड़क से संसद तक उठेगी आवाज 

रेल संघर्ष समिति का कहना है कि पड़ोसी जिलों में आंदोलनों के बाद सरकार तुरंत सक्रिय हो जाती है, लेकिन मंडला की शांतिपूर्ण मांगों को कमजोरी समझा गया। अब जिलाव्यापी शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। समिति ने इसे जनभावना का अंतिम अल्टीमेटम बताया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इन मांगों पर आधिकारिक और विश्वसनीय जवाब नहीं मिला, तो आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी। मंडला अब अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाने को तैयार है।



 

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