भरोसा, सेवा और उम्मीद का दूसरा नाम घुटास की रागिनी

घुटास की रागिनी, भरोसा, सेवा और उम्मीद का दूसरा नाम

  • भरोसा, सेवा और उम्मीद का दूसरा नाम घुटास की रागिनी
  • मंडला के घुटास में शाखा डाकपाल रागिनी राजपूत की कहानी
  • दूरस्थ जनजातीय गांव में डाकपाल बनी आशा का एकमात्र द्वार
  • घर-घर पहुँचा रही विश्वास और अधिकार

मंडला महावीर न्यूज 29. मध्यप्रदेश के हरे-भरे मंडला जिले के दूरस्थ जनजातीय गांव घुटास में शाखा डाकपाल रागिनी राजपूत सिर्फ डाक लेकर नहीं चलतीं, बल्कि वह अपने कंधे पर पूरे गांव की उम्मीदें और अधिकारों का भार लेकर निकलती हैं। उनके आने भर से गाँव के लोगों के चेहरे पर एक गहरा विश्वास और मुस्कान खिल उठती है।जानकारी अनुसार घुटास जैसे दूरस्थ जनजातीय गांव में रागिनी का पद केवल सरकारी दायित्व नहीं है। गाँव के लोग उन्हें आशा का एकमात्र द्वार, सरकारी योजनाओं की पहली सीढ़ी और विश्वास की सबसे मजबूत कड़ी मानते हैं। रागिनी हर दिन सुबह पगडंडियों पर चलती हुई घर-घर दस्तक देती हैं, जिससे उन्हें लगता है कि जैसे पूरा गांव एक परिवार से जुड़ता चला जा रहा है।

सेवा का सर्वोच्च धर्म 

रागिनी अपने थैले में पत्रों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की रोशनी भी लेकर चलती हैं। वह सुकन्या समृद्धि योजना के जरिए छोटी बच्चियों के भविष्य में उजाला भर देती हैं। वह पेंशन राशि घर तक पहुँचाकर यह सुनिश्चित करती हैं कि उम्र की ढलान में किसी भी बुजुर्ग को अपनी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। रागिनी के लिए घुटास गांव सिर्फ कार्यस्थल नहीं, बल्कि एक परिवार है, और यह परिवार उन पर पूरा भरोसा करता है।

योजनाओं की जानकारी से सशक्तिकरण 

रागिनी न केवल डाक सेवा, बीमा और बचत योजनाओं की जानकारी देती हैं, बल्कि वह जनजातीय परिवारों को यह भी समझाती हैं कि कैसे ये कल्याणकारी योजनाएँ उनके जीवन को बदल सकती हैं। उनकी वजह से घुटास के ग्रामीण अब समझते हैं कि सरकार की योजनाएँ उनके लिए ही बनी हैं और उन्हें पाने का रास्ता उन्हीं के गाँव में है। रागिनी राजपूत अपनी निस्वार्थ सेवा से जनजातीय परिवारों के अधिकारों को मजबूत करने का काम कर रही हैं।



 

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