माँ नर्मदा संरक्षण के लिए 1800 दिनों से निराहार अवधूत संत दादा गुरु

पूज्य संत दादा गुरु के दर्शन के लिए उमड़े हजारों श्रद्धालु, नर्मदा संवाद से किया जागरूक

  • माँ नर्मदा संरक्षण के लिए 1800 दिनों से निराहार अवधूत संत दादा गुरु का घुटास और बिछिया में भव्य आगमन

मंडला महावीर न्यूज 29. देश भर में माँ नर्मदा मिशन के माध्यम से नर्मदा संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का संदेश दे रहे अवधूत संत पूज्य दादा गुरु जी का घुटास और भुआ बिछिया में आगमन हुआ। संत दादा गुरु लगभग 1800 दिनों से लगातार निराहार रहकर केवल नर्मदा जल के सहारे अपना जीवन जी रहे हैं, जिनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।

बताया गया कि पूज्य गुरुदेव ने अल्प प्रवास के दौरान भक्तगणों से माँ नर्मदा संवाद करते हुए नर्मदा की महिमा और इसके पवित्र जल की शक्ति के बारे में अपना आशीर्वचन दिया। उन्होंने दुनिया को दिखाया है कि नर्मदा का जल सिर्फ जल नहीं, बल्कि एक शक्ति और आस्था है। घुटास में दादा गुरु जी सबसे पहले गुरु सेवक नीरज यादव के निवास स्थान पहुँचे। यादव परिवार ने शाल, श्रीफल और पुष्प से उनका स्वागत किया। गुरुदेव ने नीरज यादव के अस्वस्थ पिता सोनू लाल यादव सहित पूरे परिवार को आशीर्वाद प्रदान किया।

रामधुन समापन शामिल हुए दादा गुरू 

इसके बाद दादा गुरू यादव परिवार द्वारा आयोजित रामधुन के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए। जनसमूह को संबोधित करते हुए दादा गुरु ने कहा कि धन धारक को अदा करने का वचन देता है, और पर्यावरण स्वच्छ और स्वस्थ जीवन प्रदान करने का वचन देता है। घुटास में यादव समाज अमरपुर, समनापुर, बिछिया, मवई और मंडला से आए नृत्य दलों ने अपने सामाजिक पारंपरिक अहिरी नृत्य के द्वारा दादा गुरु का भव्य स्वागत किया। गुरु सेवक नीरज यादव द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के लिए पूरे नगर को तोरण द्वारों और पुष्प वर्षा से सजाया गया था।

बिछिया में भी हुआ भव्य स्वागत 

घुटास से आगे बढ़ते हुए अल्प प्रवास के दौरान भुआ बिछिया में भी दादा गुरु का भव्य स्वागत किया गया। समाजसेवी शिवकुमार साहू, राजेंद्र साहू, कृष्ण कुमार साहू के निवास पर पुष्प वर्षा और आतिशबाजी के साथ उनका अभिनंदन किया गया। राजेंद्र साहू द्वारा दादा गुरु की आरती की गई, जबकि सुदेश नामदेव ने शाल श्रीफल भेंट किया। इस दौरान गुरु सेवक विकास गोस्वामी और नीरज यादव भी उनके साथ मौजूद रहे। पूज्य दादा गुरु अब अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हुए रवाना हो गए हैं, जहाँ वे अपने मिशन को जारी रखेंगे।



 

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