काशी विश्वनाथ वैदिक गुरुकुल गाजीपुर जिलहरी घाट मंडला द्वारा वीरांगना क्षत्राणी गरबा
- तलवार और ढाल के साथ मंच पर उतरी क्षत्राणियां
- मंडला ने देखा मातृशक्ति के शौर्य का अद्भुत प्रदर्शन
- मंडला में पहली बार हुआ शौर्य और भक्ति का अनूठा संगम
मंडला महावीर न्यूज 29. नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर मंडला नगर ने पहली बार एक ऐतिहासिक और रोमांचक आयोजन देखा। वीरांगना क्षत्राणी गरबा में धार्मिक आस्था और पारंपरिक गरबा के साथ मातृशक्ति के साहस, पराक्रम और गौरवशाली संस्कृति का अद्वितीय संगम देखने को मिला। विगत दिवस स्टेडियम ग्राउंड के समीप युवम पंडाल में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक मौजूद रहे। शाम 6 बजे से 9 बजे तक चले इस आयोजन का मुख्य आकर्षण विशेष रूप से प्रशिक्षित आर्य वीरांगना क्षत्राणियों द्वारा तलवार और ढाल के साथ प्रस्तुत गरबा रहा।
बताया गया कि जब ये आर्य वीरांगना क्षत्राणियां पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर मंच पर उतरीं, तो पूरा वातावरण तालियों की गढग़ढ़़ाहाट से गूंज उठा। यह शौर्य प्रदर्शन श्रद्धा और शक्ति दोनों का प्रतीक बना। दूसरी ओर क्षत्राणी परंपरा और आर्य वीरांगनाओं के साहस का परिचय भी मिला। यह प्रदर्शन नगरवासियों के लिए एक अविस्मरणीय और गर्व से भर देने वाला क्षण बन गया।
इस प्रभावशाली आयोजन को सफल बनाने में युवम् परिवार का विशेष सहयोग रहा तथा आचार्या अभिलाषा आर्या जी और आचार्य सत्यम् आर्य जी दिल्ली ने शस्त्र और शास्त्र का विशेष प्रशिक्षण देकर आर्य वीरांगनाओ का आत्मविश्वास को जगाया तथा मंडला क्षेत्र का गौरव बढ़ाया ।
प्रशिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण के चलते ही मंच पर आर्य वीरांगना क्षत्राणियों का प्रदर्शन अत्यंत प्रभावशाली और अनुशासित नजर आया। युवम परिवार के प्रमुख आलोक खारया ने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन या परंपरागत गरबा का हिस्सा नहीं है, बल्कि हमारी मातृशक्ति के शौर्य और संस्कृति का उत्सव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पहली बार इस स्वरूप में आर्य वीरांगना क्षत्राणियों का मंच पर उतरना आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और काशी विश्वनाथ वैदिक गुरुकुल गयाजीपुर जिलहरीघाट के आचार्य भीमदेव ने बताया की नारी राष्ट्र की आधारशिला है शास्त्रों में कहा है कि माता निर्माता भवति बच्चों का असली निर्माण मां ही करती है इसलिए मां को शस्त्र और शास्त्रों में निपुण अवश्य होना चाहिए
आयोजन के समापन पर पूरा पंडाल भक्ति, ऊर्जा और गर्व के माहौल से गूंज उठा। नगरवासियों ने इस वीरांगना क्षत्राणी गरबा को मंडला के इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया, जिसने न केवल नवरात्रि की गरिमा को बढ़ाया, बल्कि समाज में मातृशक्ति की महत्ता और पराक्रम की भावना को भी पुनर्जीवित किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीमती प्रीति आर्या ( मौर्याद्ध), सुमिता नामदेव, अनुपमा (आर्या) पटेल और महेंद्र आर्य, विभु आर्य, रामचंद्र आर्य तथा समस्त मातृशक्ति व गुरुकुल परिवार मंडला का विशेष सहयोग रहा।










