परिवार और समाज के लिए एक मजबूत नींव के समान होती है बेटियां

बेटी दिवस

  • बेटियां प्यार, सम्मान की हकदार है, परिवार में बेटी की महत्वपूर्ण भूमिका
  • परिवार और समाज के लिए एक मजबूत नींव के समान होती है बेटियां

मंडला महावीर न्यूज 29. घर आने पर दौड़ कर जो पास आए, उसे कहते है बिटिया, थक जाने पर प्यार से जो माथा सहलाए उसे कहते है बिटिया। बेटिया आज बेटों से कम नहीं है। हर क्षेत्र में बेटियां कंधे से कंधा मिलाकर ऊंचाई को छू रही है। बेटियों के सम्मान में ही प्रतिवर्ष सितंबर माह के चौथे रविवार को राष्ट्रीय बेटी दिवस मनाया जाता है। वैसे तो बेटी दिवस का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है, पिछले कुछ दशकों से ही यह बेटी दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन की शुरुआत बेटियों के प्रति समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से की गई थी।

जानकारी अनुसार जहां भारत में बेटियों को लक्ष्मी, दुर्गा का रूप माना जाता है। वहीं बेटी दिवस उनके जीवन के महत्व को और बढ़ाता है। हर बेटी प्यार, सम्मान की हकदार है। बेटियां परिवार को बांधकर रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बेटियां घर की रौनक होती हैं और उनके बिना जीवन अधूरा होता है। बेटी दिवस का उद्देश्य समाज में बेटियों की भूमिका को हम पहचाने और उनका उत्साहवर्धन करें। वैसे तो आज बेटियों को लेकर समाज में कई तरह की रूढि़वादी सोच और भेदभाव देखने को मिलता है। ऐसे में बेटी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि बेटियां परिवार और समाज के लिए एक मजबूत नींव के समान होती है।

बताया गया कि जिस घर में मां बाप हों और बेटे हैं और बेटी न हो तो वह घर सूना सा लगता है। घर में बेटी ना होने से एक अधूरापन लगता है। जिस घर में बेटी नही होती उस घर के लोग में प्यार तो होता है, लेकिन प्यार में मिठास नही होती, बातों में लज्जा शर्म नही होती। बेटी के होने से परिवार में लगता है कि सूखे फूल में खुशबू भर दी हो। पूरा घर उस फूल से महक उठता है। घर में बेटी होती है तो लगता है घर में संस्कार ने जन्म लिया है। बेटी का घर में उछल, कूद करने से लगता है कि घर में साक्षात लक्ष्मी का वास हो। बेटियों के होने से घर में बरकत होती है।



 

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