मां के रूप को आकार दे रहे कलाकार

मां के रूप को आकार दे रहे कलाकार

  • पंडालों को दे रहे अकर्षक रूप
  • जिले भर में विराजेगी माँ भवानी
  • नवरात्रि की तैयारी में जुटे भक्त
  • मूर्तियां सूखाने में आ रही परेशानी 

मंडला महावीर न्यूज 29. शारदीय नवरात्र की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। जिसे लेकर सिद्ध पीठ, देवी मंदिरों से लेकर घरों में माँ की पूजा, आराधना की तैयारी में भक्त जुट गए है। इसी के साथ दुर्गा प्रतिमाओं को बना रहे जिले के कलाकार भी माँ को जीवंत स्वरूप देने में जी जान से जुटे है। दुर्गोत्सव प्रारंभ होने में अब शेष एक सप्ताह रह गए है। शहर में अधिकांश मूर्तियां सिंहवाहिनी वार्ड, सराफा बाजार, महाराजपुर संगम मार्ग समेत अन्य क्षेत्र में बनाई जा रही हैं। मूर्तिकार फिलहाल माँ की प्रतिमा को आकार दे चुके है। प्रतिमाएं माँ के स्वरूप में ढल चुकी है, अब मूर्तियों को सूखने का कार्य किया जा रहा है। मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं को भव्य रूप देने में जुटे हैं। 22 सितंबर से शुरू होने वाले नवरात्र को लेकर लोगों में भी काफी उत्साह है। मां दुर्गा की मूर्तियों को भव्य रूप देने के लिए मूर्तिकार दिन-रात काम में जुटे हुए हैं। मूर्तिकार लक्ष्मीनारायण ने बताया कि माँ के रूप को जीवंत आकार देने का प्रयास कर रहे है। जिससे लोग इनकी बनाई गई प्रतिमा की ओर आकर्षित हो। मूर्तिकार लक्ष्मीनारायण ने बताया कि उनके यहां वर्षों से मूर्ति बनाने की परंपरा चली आ रही है। जिसका वह पूर्ण उत्साह और लगन के साथ निर्वाहन कर रहे है।

जानकारी अनुसार मूर्तिकारों के सामने मिट्ïटी और बांस का संकट बरकरार है। पिछले लगभग 50 वर्षो से मूर्तियां बनाने वाले शहर के मूर्तिकारों ने बताया कि इन प्रतिमाओं को बनाने के लिए खीसा मिट्ïटी का उपयोग किया जाता है। चार स्थानो की मिट्टी के लिए मूर्तिकारो को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। मूर्तिकारों ने बताया कि सभी जगह से मिट्ïटी लाये जाने के पहले वहां इसका विधि-विधान से पूजन पाठ किया जाता है। यह मिट्ïटी बंजर नदी के किनारे के ग्राम ठरका और सिलगी में पाई जाती है लेकिन ईंट भट्ïटे वालों की वजह से मिट्ïटी मुश्किल से मिल पाती है। मूर्तिकारों ने बताया कि उन्हें मूर्तियों के लिए बांस की कमी से भी जूझना पड़ता है।

मूर्तियां सूखाने में आ रही परेशानी 

मूर्तिकारों ने बताया कि दुर्गा प्रतिमा को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। मूर्तियां सूखने के बाद ही कलर करने और साज सज्जा की तैयारी शुरू की जाएगी, लेकिन विगत दिनों से मौसम के मिजाज फिर बदल गए है। अचानक हो रही बारिश के कारण मूर्तिकारों द्वारा बनाई जा रही मूर्तियां सूख नहीं है। जिसके कारण मूर्तिकारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मूर्तियां सूखाने के लिए कई प्रकार के उपाए इनके द्वारा किये जा रहे है। जिससे समय पर मूर्तियां सूख जाए और मूर्तियों को अंतिम रूप देने की तैयारी शुरू की जा सके।

जमकर चल रही तैयारी 

नवरात्र की तैयारियों में ग्रामीण क्षेत्रों के देवी भक्त भी जुटे हुए है। पंडालो का काम अंतिम चरण में चल रहा है। अंतिम तैयारियों को लेकर बैठको का दौर भी आयोजित किए जा रहे है। स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं को मूर्तिकार द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है। ग्राम में नवरात्र पर्व को लेकर आकर्षक साज सजावट की जाने की तैयारी है। नवरात्र को लेकर ग्रामीणजनो में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

ग्रामीण अंचलों में उत्साह 

नवरात्रि पर्व के पहले नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में पंडाल बनाने की तैयारी प्रारंभ हो गई है। मूर्तिकारों के घरों में मां दुर्गा की विभिन्न रूपों की आकर्षक प्रतिमाएं अंतिम आकार में पहुंच चुकी है। रंग-रोगन व साज-सज्जा का कार्य शेष है। नगर में एक सैकड़ा के आसपास समितियों द्वारा प्रतिमा स्थापित की जा सकती है। इनमें जिला मुख्यालय के विभिन्न स्थानों के साथ बिनैका, सेमरखापा, आस्तिक चौक, करिया बाबा चौक, खेरमाई समिति, चौरसिया मोहल्ला, दुर्गा समिति, पुराना बस स्टेंड, रघुवंशी मोहल्ला, माल बाबा चौक, टिकरी वार्ड समिति, हरदहा मोहल्ला मढिय़ा मोहल्ला, साहू मोहल्ला शामिल है। शीतला मंदिर समिति द्वारा भी तैयारियां की जा रही है। हवेली क्षेत्र के ग्रामीण अंचल ढेंकों, ग्वारा, लिमरूआ, जहरमऊ, सिलगी, लफरा, मांगा, अमझर, दानीटोला, ठरका, कौरगांव में भी दुर्गोत्सव पर्व की तैयारी की जा रही है।

अलग-अलग रूप में दर्शन देंगी माँ भवानी 

इस वर्ष नवरात्र उत्सव काफी उत्साह के साथ मनाया जाएगा। भक्तों में अभी से काफी उत्साह देखा जा रहा है। माँ की उपासना के लिए मूर्तिकार माँ को विभिन्न रूपों में आकार दे रहे है। जिसमें कही माँ भवानी राक्षस का वध करतीं, तो कहीं कमल और रथ पर सवार मां दुर्गा के दर्शन भक्त करेंगे। ज्यादातर प्रतिमाएं 4 से 14 फीट तक ऊंचाई में है। प्रतिमाओं में कही राक्षस का वध करती, तो कहीं रथ और सिंह पर सवार मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार हो रही है। कलाकार प्रतिमाओं के चेहरों पर तेज और भाव स्पष्ट तौर पर उभरकर आए इसके लिए पूरे समर्पण भाव से प्रयासरत है। वहीं सिंह के चेहरे पर कहीं क्रोध दिखाने और राक्षस के चेहरों पर दर्द का भाव लाने के लिए मूर्तिकार पूरा प्रयास कर रहे है।

प्रतिवर्ष आकर्षण का केंद्र रहती है मां काली 

जिले के कुछ स्थानों में माँ काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है, जो हर वर्ष आकर्षण का केन्द्र रहती है। जिला मुख्यालय के कोष्टा मोहल्ला में हजारों की संख्या में भक्त माँ काली के दर्शन करने पहुंचते है। यहां स्थापित होने वाली मूर्ति प्रतिवर्ष आकर्षक का केन्द्र रहती है। इस वर्ष भी जिला मुख्यालय समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रो में मां काली की प्रतिमा जमाई जाएगी। जिसकी तैयारी भक्त कर रहे है।



 

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