नई पद्धति से प्राकृतिक खेती करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर

नई पद्धति से प्राकृतिक खेती करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर

  • किसानों को रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान की जानकारी होना चाहिए-कैबिनेट मंत्री
  • कोदो-कुटकी की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी करेगी सरकार-मंडला सांसद
  • रासायनिक खेती के नुकसान और जैविक खेती के लाभ

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरडी कॉलेज के ऑडिटोरियम हॉल में एक कृषक संगोष्ठी और कलेक्टर कृषक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पीएचई मंत्री संपतिया उईके और मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने आयोजित कार्यक्रम में जिलेभर से आए किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

पीएचई मंत्री संपतिया उईके ने अपने संबोधन में कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों को रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान और इसके विकल्प के रूप में जैविक व प्राकृतिक खेती अपनाने के फायदे बताए। उन्होंने कहा कि जैविक खेती आसान और किफायती है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और स्वस्थ अनाज का उत्पादन होता है, जिसकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
पीएचई मंत्री संपतिया उईके ने श्रीअन्न (मोटे अनाज) जैसे कोदो-कुटकी के महत्व पर भी जोर दिया, क्योंकि यह कम पानी में भी अधिक पैदावार देते हैं। उन्होंने घोषणा की कि सरकार रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना के तहत कोदो-कुटकी की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी करेगी और इसके उत्पादकों को प्रति क्विंटल एक हजार रुपये का बोनस भी दिया जाएगा।

सरकार हर संभव सहायता के लिए तैयार 

मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि यह योजना मिलेट्स उत्पादक किसानों के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है। उन्होंने किसानों को खेत-तालाब योजना और गौपालन के माध्यम से आय बढ़ाने के तरीके भी सुझाए। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने कहा कि मंडला की जलवायु मिलेट्स के उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त है और इसे मिलेट्स के ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने किसानों से नरवाई न जलाने की अपील की और नरवाई प्रबंधन की नई तकनीकों का उपयोग करने को कहा।

पूर्वज करते थे प्राकृतिक खेती 

जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम ने कहा कि आज कृषि योग्य भूमि कम हो रही है इसलिए जरूरी है कि हम प्राकृतिक कृषि के साथ खेती की नवीन तकनीकी को अपनाएं। इसके लिए हमें मछली पालन, कुक्कुट पालन और गौपालन को कृषि के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है। कृषि में मल्टीलेयर क्रापिंग जैसी पद्धतियों का उपयोग बेहतर विकल्प हो सकता है। प्राकृतिक कृषि में लागत को कम करके किसान अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम में बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने कहा कि इस तरह की संगोष्ठी का आयोजन सराहनीय कदम है। कृषक संवाद के ऐसे कार्यक्रम में किसानों की समस्याओं को भी साझा करना आवश्यक है अन्यथा इनका आयोजन अधूरा रहता है। संगोष्ठी में अपने अनुभव साझा करते निवास विधायक चैनसिंह वरकड़े ने कहा कि हमारे पूर्वज पहले प्राकृतिक खेती ही किया करते थे हल-बैल से खेती होती थी। वर्तमान परिवेश में खेती के तौर तरीकों में बदलाव आया है। हमें नई पद्धति से प्राकृतिक खेती करनी होगी। जिससे हमारा स्वास्थ्य भी बेहतर होगा और भूमि की उर्वरता भी बनी रहेगी।

प्राकृतिक खेती के लिए 6250 किसानों का पंजीयन 

डीडीए अश्विनी झारिया ने कृषक संगोष्ठी में बताया कि प्राकृतिक खेती योजना अंतर्गत जिले में 50 क्लस्टर का निर्माण किया गया है जिसमें 100 कृषक सखी भी बनाई गई है। प्राकृतिक खेती योजना अंतर्गत 6250 किसानो का पंजीयन किया गया है। इस दौरान नगरपालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा, जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि समिति के सभापति भूपेन्द्र वडकड़े, जिला पंचायत शैलेश मिश्रा ने भी जैविक एवं प्राकृतिक के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में रानू राजपूत, हरिसिंह पंद्रे, विनोद चौरसिया, ललित लोधी, राकेश पटेल, उमेश शुक्ला, लालजू मर्सकोले सहित अन्य जनप्रतिनिधी और कृषि विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, कृषि सखी एवं जिले के प्रगतिशील कृषक मौजूद रहे।



 

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