किसानों की आय बढ़ाने तीन हजार एकड़ में सुपरफूड क्विनोआ और चिया की होगी खेती

किसानों की आय बढ़ाने तीन हजार एकड़ में सुपरफूड क्विनोआ और चिया की होगी खेती

  • प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए क्लस्टर बनाने की चल रही तैयारी
  • 6250 एकड़ में हो रही प्राकृतिक खेती
  • किसानों को मिलेगा 100 प्रतिशत अनुदान

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत एक पहल शुरू की गई है। वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना के तहत जिले के 9 विकासखंडों में 6250 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक किसान को एक-एक एकड़ भूमि पर उन्नत तकनीक के साथ प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस पहल का एक मुख्य लक्ष्य कृषि उत्पादन में संभावित कमी की आशंका को दूर करना है। इसके लिए प्रशासन ने अधिक महंगी और लाभकारी सुपरफूड फसल, जिसमें क्विनोआ और चिया की खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया है। योजना के अंतर्गत एक हजार एकड़ में क्विनोआ और दो हजार एकड़ में चिया फसल की खेती का नवाचार किया जा रहा है।

जानकारी अनुसार किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए आत्मा परियोजना द्वारा इन फसलों के बीज 100 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके इसके साथ ही किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। इस कदम से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में टिकाऊ और लाभकारी कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस योजना को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इन सुपरफूड फसलों की बोवनी का कार्य अक्टूबर से नबंवर माह के बीच करने की योजना बनाई गई है।

बताया गया कि यह पहल कृषि विभाग ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की है। इसके तहत विभाग ने क्विनोआ की खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके लिए किसानों को क्लस्टर बनाकर एक साथ जोड़ा जाएगा, जिससे वे इस खेती को आसानी से अपना सकें। इस योजना से किसानों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है, क्योंकि क्विनोआ की मांग बाजारों में लगातार बढ़ रही है।

क्लस्टर बनाकर करेंगे खेती 

इस योजना के तहत किसानों को क्लस्टर के रूप में संगठित किया जाएगा। जिले में 6250 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है, और इन किसानों को क्लस्टर में शामिल किया जाएगा। हर क्लस्टर में लगभग 100 से 125 किसानों को जोड़ा जाएगा। इन किसानों को एक हजार एकड़ भूमि पर क्विनोआ की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। किसान एक हजार एकड़ भूमि में से एक हजार एकड़ भूमि पर क्विनोआ की खेती के साथ अन्य प्राकृतिक फसलों की खेती करेंगे।

एफपीओ के माध्यम से की जाएगी खरीद 

इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्विनोआ की खेती करने वाले किसानों को फसल की बिक्री के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। कृषि विभाग ने एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) के माध्यम से किसानों की फसल खरीदने की व्यवस्था की है। एफपीओ किसानों से सीधे उनकी फसल खरीदेगा और उन्हें उचित दाम देगा। इससे किसानों को बाजारों में अपनी फसल बेचने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और उन्हें अपनी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा।

क्विनोआ में है स्वास्थ्य का खजाना 

क्विनोआ एक प्रकार का सुपरफूड बीज है जो बहुत ही फायदेमंद होता है। इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र के लिए बहुत जरूरी है। यह ग्लूटेन-मुक्त होता है, इसलिए जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी है, वे भी इसे खा सकते हैं। इसके साथ ही क्विनोआ में प्रोटीन, विटामिन और अन्य खनिज भी पाए जाते हैं। यह न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि बीमारियों से लडऩे में भी मदद करता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, फाइबर, और विटामिन बी की भरपूर मात्रा होती है। इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम, और आयरन भी पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

करीब चार माह में हो जाती है चिया फसल तैयार 

बताया गया कि चिया सीड की फसल 3 से 4 महीने में तैयार हो जाती है और पकने पर इसकी पत्तियां गिर जाती हैं। फसल पकने के बाद इसके तने में सिर्फ बालियां बचती हैं, जैसे सरसों के पौधों पर होता है। फसल काटने के बाद 5-6 दिन इसे धूप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। बीज को अलग करने के लिए थ्रेसर मशीन या डंडे का उपयोग किया जाता है। इस सब प्रक्रिया के बाद एक एकड़ में करीब 5 से 06 क्विटंल चिया बीज मिल पाता है।

अन्य फसल से ज्यादा होता है चिया से फायदा 

बताया गया कि एक एकड़ खेत में किसान 5 से 06 क्विंटल चिया सीड उत्पादन कर सकता है। चिया सीड की मंडी बाजार में कीमत अन्य फसलों से काफी अच्छी है, जिसके चलते यदि किसान इसकी अच्छी पैदावार कर ले तो एक अच्छा मुनाफा अन्य फसलों से की अपेक्षा ले सकते है। कृषि उपसंचालक अश्विनी झारिया ने बताया कि एक एकड़ में करीब 90 हजार रूपए तक किसान इस फसल से कमा सकते है। करीब चार माह बाद इस फसल से खेत भी खाली हो जाता है, इसके बाद किसान दूसरी फसल इस खेत में लगा सकता है। वहीं चिया सीड की बुवाई जून से जुलाई के बीच और इसके बाद अक्टूबर से नवंबर के बीच की जा सकती है।

इनका कहना है

6250 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है। एक हजार एकड़ भूमि पर क्विनोआ और दो हजार एकड़ में चिया की खेती करने का लक्ष्य है। कृषि विभाग क्विनोआ और अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
अश्विनी झारिया, उपसंचालक, कृषि विभाग, मंडला



 

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