पीएचसी बबलिया भवन जर्जर, टपक रही छतें

बबलिया स्वास्थ्य केंद्र में हालत बदतर, आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे

  • पीएचसी बबलिया भवन जर्जर, टपक रही छतें
  • भवन को बाहर से कर दिया रंगरोगन, अंदर स्थिति बद से बदत्तर
  • बबलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का अंबार, मरीज और परिजन परेशान

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्थित बबलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। अस्पताल की वर्षो पुरानी बिल्डिंग इतनी जर्जर हो चुकी है, जिसे बाहर से रंग रोगन कर नया स्वरूप देने का प्रयास किया गया, लेकिन वास्तविक स्थिति अंदर जाने के बाद स्पष्ट होती है। चारों तरफ से छत का पानी टपक रहा है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों, प्रसव कराने वाली महिलाओं और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल में मरीजों के बैठने, दवाइयां रखने या डॉक्टरों के लिए सुविधायुक्त कमरों की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि कर्मचारियों के कमरों और दवाखाना में भी छत से पानी टपकता है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है। बताया गया कि गांव कुडोपानी से अपनी बेटी सुनीता को प्रसव के लिए लाईं सुंदरिया बाई ने बताया कि रातभर पानी टपकने के कारण उन्हें अपने खाना बनाने वाले बर्तन टपका के नीचे रखने पड़े। इसी तरह धनगांव की जुगनू बाई मार्को भी अपनी बेटी अनुसूया बाई को लेकर यहां आई हैं, और उन्हें भी बैठने-सोने की जगह नहीं मिल रही है।

जुगनू बाई ने बताया कि प्रसव के बाद महिलाओं के लिए चाय और दलिया बनाना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि यहां न बैठने की व्यवस्था है, न रुकने की। हम रात-दिन परेशान रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक ने इस समस्या को लेकर आश्वासन दिया था कि विधायक निधि से टीन शेड या रुकने की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बताया गया कि यह कोई पहली बार नहीं है जब बबलिया पीएचसी की दुर्दशा सामने आई है। पूर्व में भी समाचार पत्र में इसकी खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी बदहाल हैं, जिससे आमजन परेशान है। लोगों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इन व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाएं।



 

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