पालने में झुलाया झूला, खिलाया माखन, मनाया जन्मोत्सव
- हुए विविध आयोजन, शंख, घंटा और राधे, कृष्ण की धुन से गुंजायमान रहा जिला
मंडला महावीर न्यूज 29. शहर में कृष्ण जन्माष्टमी घर-घर में धूमधाम के साथ मनाई गई। भक्तों ने बाल गोपाल को पालने में झुलाया। मुख्यायल समेत ग्रामीण क्षेत्र के राधा कृष्ण मंदिरों को सुंदर सजाकर सुबह से ही धार्मिक आयोजनों की शुरूआत की। जहां दिनभर विभिन्न अनुष्ठान चलते रहे। इस वर्ष जन्माष्टमी भक्तों के लिए खास रही। भक्तों में खासा उत्साह रहा। घर-घर में राधा-कृष्ण की झांकी बनाई गई। छोटे बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में तैयार किया गया और जन्माष्टमी पर्व मनाया गया।
कान्हा के जन्मोत्सव पर हर किसी श्रद्धालु ने इसी भाव के साथ खुशी मनाई। कान्हा के जन्म पर मंदिरों और घरों में पूजा अर्चना हुई। घर और मंदिरों में बंदनवार सजाए गए। सभी जगह नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल के स्वर गुंजते रहे। चारों ओर शंख व घंटों की गूंज ने वातावरण को आनंदित कर दिया। नगर के विभिन्न मंदिरों में नटखट कन्हैया के दर्शन करने का सिलसिला चलता रहा।
श्रृंगार कर किया पूजन
घरो में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष आयोजन के साथ मनाई गई। रपटा घाट में लड्डू गोपाल को पालने में झुलाया गया। बुधवारी स्थित कृष्ण मंदिर में राधा-कृष्ण का विशेष पूजन किया गया। बाल गोपाल को पालने में झुलाया गया। लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया एवं भक्तो में पंचामृत का प्रसाद वितरित किया गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शहर सहित नगरों व ग्रामों में विविध आयोजन हुये। देर रात श्रीकृष्ण का जन्म कराया गया व भजन कीर्तन किया गया। कृष्ण मंदिरों में आकर्षक झांकियां सजाई गई। जन्माष्टमी के चलते शहर के कृष्ण मंदिरों में विविध आयोजन किये गये। राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं का विशेष श्रृंगार किया गया। जन्माष्टमी के चलते श्रृद्धालु भगवान कृष्ण के दर्शन करने मंदिर पहुंचे और श्रृद्धा भक्तिभाव से पूजन संपन्न किया।
जगह-जगह हुए आयोजन
जन्मष्टमी के अवसर पर नगर में विविध आयोजन किये गए। जीवंत झाकिंयों के साथ घर-घर में राधा कृष्ण बनाए गए। बच्चों को राधा कृष्ण की भेषवूशा में सजाया गया। नगर के विभिन्न मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजन होते रहे। राजीव कालोनी झंडा चौक स्थित सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति द्वारा मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित की। यहां मंदिर को सजाया गया।
ग्रंथों में लीला पुरूषोत्तम कहा गया
भगवान श्रीकृष्ण का प्रत्येक रूप मनोहारी है। उनका बालस्वरूप तो इतना मनमोहक है कि वह बचपन का एक आदर्श बन गया है। इसीलिए जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के इसी रूप की पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें वे चुराकर माखन खाते हैं, गोपियों की मटकी तोड़ते हैं और खेल-खेल में असुरों का सफाया भी कर देते हैं। इसी प्रकार उनकी रासलीला, गोपियों के प्रति प्रेम वाला स्वरूप भी मनमोहक है। इसी प्रकार उनका योगेश्वर रूप और महाभारत में अर्जुन के पथ-प्रदर्शक वाला रूप सभी को लुभाता और प्रेरणा देता है। अपनी लीलाओं में वे माखनचोर हैं, अर्जुन के भ्रांति-विदारक हैं, गरीब सुदामा के परम मित्र हैं, द्रौपदी के रक्षक हैं, राधाजी के प्राणप्रिय हैं, इंद्र का मान भंग करने वाले गोवर्धनधारी हैं। उनके सभी रूप और उनके सभी कार्य उनकी लीलाएं हैं। उनकी लीलाएं इतनी बहुआयामी हैं कि उन्हें सनातन ग्रंथों में लीलापुरुषोत्तम कहा गया है।










