पारंपरिक पूजन-अर्चन के साथ मनाया लव-कुश जन्मोत्सव
- कछवाहा समाज ने श्रीराम मंदिर पड़ाव में की विशेष पूजा
- पूजन, आरती के बाद किया प्रसाद वितरण
मंडला महावीर न्यूज 29. कछवाहा समाज ने श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर भगवान लव और कुश का जन्मोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया। श्रीराम मंदिर पड़ाव स्थित कछवाहा मंगल भवन परिसर में नवनिर्मित लवकुश मंदिर में समाज के बंधुओं ने एकजुट होकर पूजन-अर्चन किया। इस आयोजन से समाज के लोगों ने अपनी गौरवशाली परंपरा को याद किया। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रंजीत कछवाहा ने बताया कि यह आयोजन लवकुश भवन में संपन्न हुआ। कछवाहा समाज के अध्यक्ष शशिशंकर कछवाहा ने इस दिन के महत्व को समझाते हुए बताया कि श्रावण पूर्णिमा कुशवाहों के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसी दिन माता जानकी ने जुड़वां पुत्रों, लव और कुश को जन्म दिया था। उन्होंने बताया कि कुश से ही कुशवाह वंश की शुरुआत हुई और सभी सनातनी कुशवाह उन्हें अपना जनक मानते हैं। इस दिन घरों में भगवान राम, माता जानकी और लव-कुश की विशेष पूजा की जाती है।

शशिशंकर कछवाहा ने कहा कि कुशवाह समाज माता जानकी को अपनी प्रथम शिक्षिका मानता है, जिन्होंने लव-कुश को संस्कार और ज्ञान दिया। ऋषि वाल्मीकि ने उन्हें धनुर्विद्या और वेदों का ज्ञान प्रदान किया। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों के अनुसार त्रेतायुग से चला यह वंश आगे चलकर कछवाहा, कच्छपघात, काछी आदि नामों से जाना गया। उन्होंने महाभारत काल का भी उल्लेख करते हुए बताया कि काछी शब्द का प्रयोग अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाली सेना के लिए किया गया है।
कछवाहा समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है, जिसका राज्य अयोध्या, नरवरगढ़, ग्वालियर और जयपुर जैसे स्थानों में था। इस वंश में महाराजा नल और राजा मानसिंह जैसे वीर योद्धाओं ने जन्म लिया। आधुनिक इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई के सारथी करणसिंह कछवाहा और लोकतंत्र की स्थापना में जयपुर स्टेट के योगदान का भी जिक्र किया गया। इस गौरवपूर्ण इतिहास और परंपरा को याद करते हुए सभी ने पुजारी बसंत दीपू तिवारी के मार्गदर्शन में भगवान लव-कुश की आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।










