कीचड़ भरे रास्ते, बेहाल ग्रामीण, मंडला में सड़कों की सच्चाई

कीचड़ भरे रास्ते, बेहाल ग्रामीण, मंडला में सड़कों की सच्चाई

  • विकास का दावा हुआ कीचड़ में गुम
  • ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं को तरसे

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले में बारिश ने एक बार फिर सरकार के विकास के दावों की पोल खोल दी है। जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी पर स्थित ग्राम खैरीखापा के लोग आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं। यहां की सड़कें बारिश के मौसम में पूरी तरह से कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है।

बताया गया कि जो यह तस्वीर दिख रही है, वह दूर-दराज के जंगल की नहीं, बल्कि मंडला जिले की इमलीगोहान पंचायत के पोषक ग्राम खैरीखापा की है। यहां बजरंग चौराहा से खरमाई तक की सड़क पिछले कई सालों से बदहाल है और अब तो यह पूरी तरह से मिट्टी में मिल चुकी है। ग्रामीणों को हर दिन इसी कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बच्चों को स्कूल और आंगनवाड़ी जाने में मुश्किल होती है और कई बार वे इन गड्ढों में गिर जाते हैं।


सबसे गंभीर स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की है। गांव तक एंबुलेंस या जननी एक्सप्रेस का पहुंचना लगभग नामुमकिन है। किसी भी मरीज खासकर गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लिटाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों का कहना है कि क्या विकास केवल कागजों तक ही सीमित है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए यूं ही संघर्ष करना पड़ेगा? ग्रामीणों का यह संघर्ष सिस्टम की नाकामी का एक जीता-जागता उदाहरण है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

इनका कहना है

हमारी जिंदगी तो इस कीचड़ में उलझकर रह गई है। पानी भरने निकलो तो पैर धंस जाते हैं, बच्चे स्कूल जाते हैं तो गिरते-पड़ते जाते हैं। हम बस यही चाहते हैं कि सरकार हमारे लिए एक पक्की सड़क बना दे।
चेतीबाई, ग्रामीण

हमने कई बार इस सड़क के लिए अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि हमारी जीवन रेखा है। इसके अभाव में ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है।
प्रमोद यादव, उप सरपंच

ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर मंडला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इसके पहले भी ग्राम सभा में बताया गया था कि हनुमानथाना से खैरमाई और मरकाम टोला तक मार्ग बनना था, लेकिन यहां के सचिव, सरपंच अपने हिसाब से योजना तैयार करते है। यहां बनने वाली योजना ग्राम के हिसाब से नहीं बनती है, योजना सचिव, सरपंच के हिसाब से बनती है, और इस योजना को लागू करने के लिए यहां के वार्ड मेंबर, पंच और ठेकेदार को लाकर काम शुरू कर देते है।
हिरेंद्र मसराम, जनपद सदस्य



 

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