प्रशासन की अनदेखी से अधर में बच्चों का भविष्य

प्रशासन की अनदेखी से अधर में बच्चों का भविष्य

  • जर्जर हो गया बुजबुजिया का प्राथमिक शाला भवन
  • बारिश में टपकती छतें और टूटी दीवारों के बीच नौनिहाल
  • खुले आसमान में पढऩे मजबूर

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के जनपद पंचायत मंडला अंतर्गत ग्राम पंचायत सिलपुरा के प्राथमिक शाला बुजबुजिया का जर्जर भवन प्रशासनिक उपेक्षा और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन बच्चों के पास पढऩे के लिए न तो सुरक्षित छत है और न ही कोई स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था है। बीते कुछ दिनों से हो रही बारिश ने शाला भवन की पोल खोल दी है। बारिश के कारण कई बार बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में ठूंस-ठूंसकर बिठाया जाता है और जैसे ही बारिश थम जाती है, उन्हें फिर से उसी जर्जर शाला में वापस भेज दिया जाता है या शाला भवन के बाहर खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाया जाता है। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य भी खतरे में है। पिछले तीन वर्षों से इस भवन के सुधार कार्य और मरम्मत को लेकर शाला प्रबंधन और ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी गुहार को अब तक अनसुना किया जा रहा है।

जानकारी अनुसार शाला भवन की स्थिति अब चिंताजनक होती जा रही है। विगत वर्ष भी ऐसी ही स्थिति निर्मित हो गई थी। जिसके बाद बारिश के सीजन में ग्राम के ही एक व्यक्ति के घर में शाला संचालित की जा रही थी, लेकिन इस वर्ष ऐसी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इस लापरवाही से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं। ग्रामवासियों का कहना है कि यदि बच्चों के साथ कोई दुर्घटना या बीमारी होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष प्राथमिक शाला बुजबुजिया के लिए करीब तीन लाख रूपए की राशि अतिरिक्त शाला भवन निर्माण के लिए स्वीकृत किया गया था। इस राशि में करीब डेढ़ लाख रूपए की राशि ग्राम पंचायत के खाते में भी जमा कर दी गई थी, लेकिन आज तक ना ही भवन निर्माण कार्य शुरू हो पाया ना ही शाला भवन की मरम्मत कराई गई।

शिकायतों के बाद भी अनदेखी 

बताया गया कि इस अनदेखी के कारण शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कलेक्टर, विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। नतीजा यह है कि बुजबुजिया के बच्चों को शिक्षा विभाग की उपेक्षा और अधिकारियों की लापरवाही के चलते इनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।

बच्चों के भविष्य से कर रहे खिलवाड़ 

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम बुजबुजिया के नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ये बच्चे हमारे देश का भविष्य है, जिस पर प्रश्र चिन्ह लगा हुआ है। एक तरफ जहां सरकार शिक्षा के अधिकार और सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चे जर्जर भवन और खुले आसमान के नीचे पढऩे को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि उनके मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। भय और असुरक्षा के माहौल में बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता, जिससे उनकी शैक्षणिक प्रगति बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द बुजबुजिया स्कूल के लिए एक सुरक्षित और स्थायी भवन की व्यवस्था करे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे आंदोलन करने मजबूर होंगे।

इनका कहना है

शाला भवन की मरम्मत के लिए जिला शिक्षा केंद्र से अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। 26 जून को जनसुनवाई में भी शिकायत की और स्कूल संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए निवेदन किया, लेकिन इस वर्ष भी बच्चे जर्जर स्कूल भवन और खुले में बैठकर पढऩे मजबूर है।
नरेश मार्को, सरपंच, ग्राम पंचायत सिलपुरा

बुजबुजिया शाला भवन की पूरी जानकारी जिला शिक्षा केंद्र के नोडल अधिकारी को पहले भी उपलब्ध करा दी थी, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। अब उन्हें निर्देशित किया जाएगा कि इस पूरे प्रकरण का शीघ्र निराकरण करें, अन्यथा विभाग के विरुद्ध कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
इंजीनियर कमलेश तेकाम
उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष जिला शिक्षा समिति, जिला पंचायत मंडला



 

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