मवई में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
- एक डॉक्टर के भरोसे पूरा ब्लॉक, अस्पताल में डॉक्टर, स्टाफ की कमी
- सात दिन में डॉक्टर न मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी, मवई बंद का ऐलान
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के मवई क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की चरमराती स्थिति से परेशान ग्रामीणों का धैर्य बुधवार को टूट गया। उन्होंने मवई मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही डॉक्टर उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन को सात दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ और डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम जैसे कदम उठाने को बाध्य होंगे।
जानकारी अनुसार बुधवार सुबह 9.45 बजे जब ग्रामीण मवई मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद निराशाजनक था। अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीज और उनके परिजन इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन उन्हें सहायता प्रदान करने वाला कोई भी मेडिकल स्टाफ या डॉक्टर उपस्थित नहीं था। खाली कुर्सियां और सन्नाटा पसरा देखकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया। जिसके बाद ग्रामीण एकत्र हुए और प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पूरे मवई ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाओं का भार मात्र एक डॉक्टर पर है। यह स्थिति किसी भी स्वास्थ्य प्रणाली के लिए चिंताजनक है। आबादी के अनुपात में डॉक्टरों की यह भारी कमी सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है। ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन में इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि मवई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इमारत आधुनिक है और इसमें कई आवश्यक उपकरण भी मौजूद हैं। लेकिन ये सभी सुविधाएं स्टाफ नर्सों और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मात्र शोभा की वस्तु बनकर रह गई हैं। अस्पताल तो शानदार बना है, लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं, एक ग्रामीण ने कहां कि मवई अस्पताल में भौतिक संसाधन जुटाने से नहीं, बल्कि पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता से ही स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो सकती हैं।
रेफर होने से बढ़ जाता है जान को खतरा
बताया गया कि मवई में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ता है। पर्याप्त उपचार न मिल पाने के कारण उन्हें मजबूरन मंडला, जबलपुर या अन्य बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता है। अक्सर ऐसा होता है कि समय पर उपचार न मिल पाने के कारण मरीजों की जान को खतरा हो जाता है, और कई बार तो उनकी जान चली भी जाती है। यह स्थिति मवई क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी परेशानी बन चुकी है, जहां एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
प्रशासन को दिया सात दिन का अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि सात दिवस के अंदर अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य आवश्यक स्टाफ की बहाली की जाए। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें सात दिन के अंदर पूरी नहीं होती हैं, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि इस बार केवल प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि मवई बंद का आह्वान किया जाएगा और सड़कों पर चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को इस बात के लिए जिम्मेदार ठहराया कि यदि कोई अप्रिय स्थिति निर्मित होती है, तो उसकी पूरी जवाबदेही प्रशासन की होगी। धरना प्रदर्शन के दौरान इंद्रेश सागर, संतोष रानू हरदाहा एजाज खान, लक्ष्मीकांत पाठक, संदीप श्रीवास, मोहन साहू, शेख समरती, साबिर खान, लखन चक्रवर्ती, निशांत पाठक, बोधू मरावी एवं अन्य वरिष्ठ नागरिक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण इस धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।














