मवई के पांच गांवों की गुहार, पुल बना दो सरकार

मवई के पांच गांवों की गुहार, पुल बना दो सरकार

  • 60 किमी का लंबा फेरा लगाने को मजबूर ग्रामीण
  • टिकरिया पंचायत का गहिरनाला आज भी पुलविहीन
  • जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण

मंडला महावीर न्यूज 29. एक ओर जहां सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं मंडला जिले के अंतिम छोर में बसे वनांचल मवई विकासखंड की ग्राम पंचायत टिकरिया और उसके आसपास के पांच गांवों की हकीकत आज भी काला पानी से कम नहीं है। इन गांवों को जोडऩे वाला गहरानाला नदी में आज तक पुलविहीन है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों, खासकर स्कूली बच्चों और गर्भवती महिलाओं को जान जोखिम में डालकर तेज बहाव वाली नदी पार करनी पड़ती है।

जानकारी अनुसार विकासखंड मवई की ग्राम पंचायत टिकरिया समेत अन्य ग्रामों के ग्रामीण बारिश के सीजन में भारी परेशानी का सामना करने मजबूर है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो इस भयावह स्थिति को बयां कर रहा हैं, जिनमें लोग पत्थरों और लकडिय़ों के सहारे उफनती नदी पार करते दिख रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतराते हैं, क्योंकि उन्हें हर पल यह डर सताता है कि उनका बच्चा सुरक्षित वापस लौटेगा या नहीं।

बताया गया कि इन पांच गांवों के निवासियों को बिछिया, घुटास और घोंटा जैसे नजदीकी क्षेत्रों से जुडऩे के लिए 60 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। यह अतिरिक्त दूरी न सिर्फ समय और धन की बर्बादी है, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में जीवन-मरण का प्रश्न भी बन जाती है। ग्रामीणों की एक ही मांग है जो सरकार यहां पुल बना देगी, हम जीवनभर उसके आभारी रहेंगे।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मवई क्षेत्र में औषधीय वनों और साल के पेड़ों की भरमार है, लेकिन मूलभूत सुविधा के नाम पर एक अदद पुलिया तक नहीं है। आदिवासी क्षेत्रों के विकास के नाम पर भले ही अनेकों योजनाएं बनाई जाती हों, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें कागजी योजनाओं की नहीं, बल्कि सीधी कार्रवाई की जरूरत है, जिससे उनकी दशकों पुरानी यह समस्या हल हो सके और उन्हें एक सुरक्षित और सुगम मार्ग मिल सके।


 


 

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