अतिथि शिक्षक भर्ती में देरी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, सरकार पर उठे सवाल
- 16 जून से स्कूल खुले पर अतिथि शिक्षकों को अब तक नहीं मिली नियुक्ति, वादों पर अमल की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला में बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है क्योंकि 16 जून से स्कूलों के खुलने के बावजूद अतिथि शिक्षकों की भर्ती अब तक नहीं हो पाई है। पीडी खैरवार ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के शैक्षणिक कैलेंडर में 16 जून से पढ़ाई शुरू होने का उल्लेख है, लेकिन सरकारी शिक्षकों की कमी और अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में देरी के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों की पढ़ाई शुरुआत से ही ठप पड़ी है।
पीडी खैरवार ने कहां कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता गिरने का यह एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि सरकार जो गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के विकास को प्राथमिकता देने का दावा करती है, उसे 16 जून से पहले ही अतिथि शिक्षकों को स्कूलों में सेवा का अवसर देना चाहिए था। यह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराने के लिए अत्यंत आवश्यक है, खासकर तब जब सरकारी अवकाशों के कारण कक्षाएं वैसे भी कम दिन लग पाती हैं। शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की भर्ती बहुत देर से की जाती है और जब परीक्षा परिणाम कमजोर आते हैं तो इसका दोष अतिथि शिक्षकों पर मढ़ दिया जाता है। इससे अतिथि शिक्षकों को समाज और अभिभावकों के सामने बेवजह निंदा का पात्र बनना पड़ता है।
बताया गया कि अतिथि शिक्षकों की नियमितीकरण की मांग 2008 से लगातार जारी है, लेकिन सरकार उन्हें जुलाई-अगस्त से नियुक्त कर 30 अप्रैल को सेवा समाप्त करने की परंपरा को खत्म करने पर अड़ी हुई है। इससे अतिथि शिक्षकों को महज 7-8 महीने में लगभग 150 कार्यदिवस ही पढ़ाने के लिए मिल पाते हैं, जो पाठ्यक्रम के अनुपात में बहुत कम हैं। पीडी खैरवार ने बताया कि चुनाव से पहले 2 सितंबर 2023 को अतिथि शिक्षकों के लिए सरकार की आधिकारिक घोषणा वार्षिक अनुबंध की हो चुकी है, जिसमें बारह महीने काम पर रखने की बात थी। डॉ. मोहन यादव की सरकार द्वारा आज तक इसका पालन नहीं किया गया है।
पीडी खैरवार ने कहां कि शासन-प्रशासन से बार-बार मांग की जा रही है कि 2024-25 में सेवा दे चुके अतिथि शिक्षकों को बिना कोई नया विज्ञापन जारी किए जल्द से जल्द सेवा में रखा जाए। साथ ही रिक्त पदों पर वरीयता क्रम और अनुभव के आधार पर सेवा से अलग हुए अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए, जिससे सरकार के आदेशों के कारण बेरोजगार हुए अतिथि शिक्षकों को फिर से सेवा का अवसर मिल सके।
डॉ. मोहन यादव भी लिख चुके हैं पत्र
बताया गया कि डॉ. मोहन यादव ने विधायक रहते हुए भी 15 मार्च 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक बनाने पर विचार करने के लिए पत्र लिखा था। अब जब डॉ. मोहन यादव स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, तो यह काम उनके स्वयं के हाथ में है। अतिथि शिक्षकों को नियमित रोजगार देने की उनकी पहल उनके कुशल और सच्चे राजनीतिक होने का परिचायक होगी।
अनुभव के आधार पर नियमितीकरण की मांग
अतिथि शिक्षक संगठन लंबे समय से यह मांग कर रहा है कि अधिकतम अनुभव के आधार पर वरिष्ठता क्रम में अतिथि शिक्षकों को नियमित रोजगार दिया जाए, जिससे प्रदेश के लगभग तीन लाख अतिथि शिक्षक परिवारों के जीवन में खुशहाली आएगी।
शिक्षक भर्ती अपात्रों को अन्य पदों पर भर्ती की भी मांग
शिक्षक भर्ती नियमों के अनुसार डीएड व बीएड के साथ शिक्षक भर्ती परीक्षा पास होना अनिवार्य होता है। इस दायरे में नहीं आने वाले अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर स्कूलों में खाली पड़े अन्य पदों पर भर्ती करने की भी सरकार से मांग की गई है।










