थानमगांव बनेगा जैविक कृषि का केंद्र
- आत्मनिर्भरता की राह-थानमगांव में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित
- ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा सशक्तिकरण
- थानमगांव में नाबार्ड और प्रदान की पहल
- वर्मी कम्पोस्ट यूनिट से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते ग्रामीण
- जैविक खेती को बढ़ावा, महिलाएं होगी सशक्त
- थानमगांव में वर्मी कम्पोस्ट क्रांति
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के निवास विकासखंड स्थित थानमगांव अब आत्मनिर्भरता और सतत विकास की ओर अग्रसर है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक और प्रदान संस्था के संयुक्त प्रयासों से ग्राम में एक आधुनिक वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन इकाई की स्थापना की गई है। यह महत्वपूर्ण पहल न केवल क्षेत्र में सतत कृषि और जैविक खेती को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को भी सशक्त करने के साथ इनके लिए नए अवसर भी सृजित करेगी। यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव लाएगी और अन्य गांवों को भी इसी प्रकार के स्थायी विकास मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
जानकारी अनुसार इस वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की स्थापना का मुख्य ध्येय थानमगांव के ग्रामीणों को रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम करने और जैविक खाद के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने में सक्षम बनाना है। इस इकाई के माध्यम से ग्रामीण अब स्वयं ही उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का निर्माण कर सकेंगे, जिससे उनकी कृषि भूमि की उर्वरता में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी आने से पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा और किसानों को खेती में आने वाली लागत को कम करके अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
बताया गया कि इस परियोजना के अंतर्गत प्रदान संस्था द्वारा वाटरशेड ग्राम विकास समिति और स्थानीय महिला किसानों के साथ मिलकर लगातार तकनीकी मार्गदर्शन और सामुदायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षण सत्रों में ग्राम की महिलाओं को केंचुआ पालन की वैज्ञानिक विधियों, गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों के प्रभावी प्रबंधन और उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कम्पोस्ट बनाने की विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है। इस कौशल विकास से न केवल महिलाएं सशक्त होंगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
अनूठी पहल से दूसरे के लिए बनेगा प्रेरणा स्त्रोत
थानमगांव में स्थापित यह वर्मी कम्पोस्ट यूनिट न केवल जैविक कृषि को बढ़ावा दे रही है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार प्राप्त करने और सामुदायिक नेतृत्व करने का भी एक सुनहरा अवसर प्रदान कर रही है। अपनी इस अनूठी पहल के साथ थानमगांव अब आसपास के अन्य गांवों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बन रहा है, जो आत्मनिर्भरता और सतत विकास की ओर अग्रसर होना चाहते हैं। यह परियोजना नाबार्ड और प्रदान संस्था के सहयोगात्मक प्रयासों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को एक साथ साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इनका कहना है
वर्मी कम्पोस्ट इकाई की स्थापना न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह थानमगांव के ग्रामीण परिवारों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि करने की क्षमता रखती है। नाबार्ड हमेशा से ही ऐसे नवोन्मेषी प्रयासों को बढ़ावा देता रहा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को सुनिश्चित कर सकें। इसके साथ ही हम इस पहल को आगे जारी रखने का प्रयास करेंगे, जिससे महिला किसान आत्मनिर्भर हो सके।
देवव्रत पाल, डीडीएम, नाबार्ड
हम वाटरशेड ग्राम विकास समिति और यहां की मेहनती महिला किसानों के साथ मिलकर लगातार तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सामुदायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य ग्राम की महिलाओं को इस वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के माध्यम से केंचुआ पालन, गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट पदार्थों के कुशल प्रबंधन में दक्ष बनाना है। यह पहल कृषि क्षेत्र में स्थानीय किसानों के लिए एक नई दिशा और आत्मनिर्भरता के अवसर खोलेगी।
अनुरूद्ध शास्त्री, प्रदान संस्था
इस नई पहल से उत्साहित है, हमें पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि हम महिलाएं भी मिलकर कुछ बड़ा और महत्वपूर्ण कार्य कर सकती हैं। अब हम अपने खेतों के लिए खुद की बनी हुई जैविक खाद का उपयोग कर पाएंगे, जिससे हमारी खेती की लागत भी काफी कम हो जाएगी और मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी। हमारा यह प्रयास अन्य महिला किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा।
लालिया बाई, महिला किसान











