रासलीला भगवान की अंतरंग लीला है
- भागवत कथा में नीलू महाराज ने बताई रासलीला की गूढ़ता
मंडला महावीर न्यूज 29. जिला मुख्यालय के अंबेडकर वार्ड स्थित सिंधी समाज के गुरुद्वारा में श्रीमद् भागवत महापुराण का संगीतमय आयोजन किया जा रहा है। कथा का वाचन पंडित नीलू महाराज द्वारा किया जा रहा है। भिरयानी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में भागवत रसिक नीलू महाराज ने रासलीला के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि रासलीला भगवान की अंतरंग लीला है, जिसमें काम का कोई स्थान नहीं है।
नीलू महाराज ने श्रोताओं को बताया कि ग्यारह वर्ष के बालक के प्रति कामभाव जागृत होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रासलीला कोई साधारण स्त्री-पुरुष का मिलन नहीं था। यदि ऐसा होता तो परम विरक्त शुकदेव जी जैसे महायोगी इसका वर्णन कदापि नहीं करते। महाराज जी ने स्पष्ट किया कि गोपी का अर्थ केवल गांव की कोई स्त्री नहीं है। उन्होंने बताया गोपी तो शुद्ध जीव का नाम है। शुद्ध हृदय का भाव, प्रेम भाव ही गोपी है। देह भान भूलकर प्रत्येक इंद्रियों से भक्ति रस का पान करने वाला जीव ही गोपी है। उन्होंने बताया कि साधारण जीव गोपी की कथा करने या सुनने का अधिकारी नहीं है। आज गुरुवार को कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन किया जाएगा।










