भगवान कृष्ण ने पूतना को देखते ही अपने नेत्र कर लिए थे बंद
- गूंजी गोवर्धन लीला की कथा, भगवान कृष्ण ने उठाया गिरीराज
- नीलू महाराज ने बताया अहंकार त्याग और प्रकृति संरक्षण का संदेश
मंडला महावीर न्यूज 29. जिला मुख्यालय के अंबेडकर वार्ड स्थित गुरुद्वारा में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण में पूतना वध के प्रसंग को विस्तार से बताते हुए भागवत रसिक नीलू महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की अद्भुत गोवर्धन लीला का मनोहारी वर्णन किया। इस प्रसंग को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा में पंडित नीलू महाराज ने पूतना वध के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आखिर क्यों भगवान कृष्ण ने पूतना को देखते ही अपने नेत्र बंद कर लिए थे, उन्होंने कहा कि पूतना एक नारी थी, और शास्त्रों में नारी को अवध्य माना गया है। भगवान को उसे मारने में संकोच हो रहा था, इसीलिए उन्होंने नेत्र बंद कर लिए। दूसरा कारण बताते हुए कहा कि भगवान की आँखों में वैराग्य का भाव है। यदि वे पूतना से सीधे आँखें मिलाते, तो उसे तुरंत ज्ञान प्राप्त हो जाता, जो कि उस समय उचित नहीं था। इसलिए उन्होंने आँखें बंद कर लीं ताकि उसे तत्काल आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति न हो। तीसरा कारण को समझाते हुए नीलू महाराज ने बताया कि भगवान जिस पर भी अपनी दृष्टि डालते हैं, उसे तुरंत उनके स्वरूप का ज्ञान हो जाता है। पूतना को अपनी वास्तविकता का ज्ञान न हो, इस कारण भी भगवान ने नेत्र बंद किए।
पंडित नीलू महाराज ने कथा में आगे बताया कि यह लीला भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र के अभिमान को तोडऩे और गोकुल वासियों को प्रकृति और गौ सेवा का महत्व समझाने के लिए रची गई थी। महाराज श्री ने कथा का वर्णन करते हुए बताया कि गोकुल के लोग प्रतिवर्ष इंद्रदेव की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करते थे, जिससे अच्छी वर्षा हो। भगवान कृष्ण ने देखा कि इस पूजा में बहुत अधिक अन्न और धन का व्यय होता है। उन्होंने गोकुल वासियों को समझाया कि उन्हें इंद्र की नहीं, बल्कि उस गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए जो उन्हें वनस्पति, गौ-धन के लिए चारा और जीवन देता है।
भगवान कृष्ण के कहने पर गोकुल वासियों ने इंद्र पूजा बंद कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इससे कुपित होकर इंद्रदेव ने घनघोर वर्षा की, जिससे गोकुल में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। तब भगवान कृष्ण ने अपने बाल स्वरूप में ही गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया और सात दिनों तक उसे उठाए रखा, जिसके नीचे सभी गोकुल वासी और उनके पशु सुरक्षित रहे। गोवर्धन लीला के वर्णन के साथ नीलू महाराज ने बताया कि इस लीला के माध्यम से भगवान ने भक्तों को यह विश्वास दिलाया कि जब भी उन पर कोई संकट आएगा, भगवान उनकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। श्रद्धालुजन इस अद्भुत कथा को सुनकर भगवान कृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति में लीन हो गए।










