कान्हा टाइगर रिजर्व की अनूठी पहल
गढ़ी बफर की 14 ईको विकास समितियों के तालाबों में छोड़ा गया 180 किलोग्राम मछली बीज
- मत्स्य पालन से स्थानीय ग्रामीणों को मिलेगा स्वरोजगार और बढ़ेगी आजीविका
- वन संरक्षण के साथ मजबूत होगी आर्थिक स्थिति
मंडला महावीर न्यूज 29. कान्हा टाइगर रिजर्व के गढ़ी बफर परिक्षेत्र के अंतर्गत स्थानीय ईको विकास समितियों के सदस्यों को स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके तहत मानसून सीजन के दौरान क्षेत्र की 14 ईको विकास समितियों के तालाबों में कुल 180 किलोग्राम मिश्रित मछली बीज का संचयन किया गया है।
जानकारी अनुसार तालाबों में छोड़े गए मछली बीज में मुख्य रूप से रोहू, कतला, ग्रास कार्प और कॉमन कार्प जैसी उन्नत प्रजातियां शामिल हैं। इन मछलियों की बेहतर और स्वस्थ वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए समितियों द्वारा तालाबों में समय-समय पर नियमित रूप से चारा भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे इनका समुचित विकास हो सके।
स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य ईको विकास समितियों से जुड़े सदस्यों को मत्स्य पालन के जरिए अतिरिक्त आय के साधन उपलब्ध कराना है। इससे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल वन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सहायक साबित होगी, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करते हुए उन्हें सीधे तौर पर संरक्षण गतिविधियों से जोडऩे की दिशा में भी एक बेहद सार्थक और दूरदर्शी प्रयास है।










