गरीब आउटसोर्स कर्मियों पर गिरी गाज, बड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर उठे सवाल
- डैनी धुर्वे मौत मामला, परिजनों को एक करोड़ मुआवजा और नौकरी की मांग
- मामले के बीच मवई क्षेत्र में गहराया बिजली संकट, परेशान ग्रामीण
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के मवई क्षेत्र में कार्यरत आउटसोर्स विद्युत कर्मचारी स्व. डैनी सिंह धुर्वे की काम के दौरान हुई दर्दनाक मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस हृदयविदारक घटना ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पीडि़त परिवार और ग्रामीण लगातार न्याय, एक करोड़ रुपये के उचित मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं। हालांकि, विभाग द्वारा केवल निचले स्तर के आउटसोर्स कर्मचारियों पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे जिम्मेदार बड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी अनुसार विगत 25 अक्टूबर की रात शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर 26 अक्टूबर की सुबह परिजनों और ग्रामीणों ने मवई स्वास्थ्य केंद्र के सामने धरना दिया। धरने में जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम ने पहुंचकर परिजनों की मांगों को जायज ठहराया। मौके पर पहुंचे कार्यपालन अभियंता बिछिया ने लाइनमैन और आरके कुशवाहा के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस को पत्र दिया। इसके बाद नायब तहसीलदार ने भी परिजनों को शासन तक मुआवजे का प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया। हाल ही में क्षेत्रीय विधायक नारायण सिंह पट्टा ने भी शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर पुलिस से जांच में तेजी लाने को कहा है, लेकिन पीडि़त परिवार अब भी ठोस कार्रवाई और प्रशासन के प्रस्ताव की प्रति का इंतजार कर रहा है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
इस घटना को लेकर 28 अक्टूबर को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मवई ने थाना प्रभारी को पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस की मांग है कि बिजली बंद और चालू करने का आदेश देने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए। क्या सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था? यह जांच का अहम विषय है। कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि केवल छोटे आउटसोर्स कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते; जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आए, उस पर कानूनी गाज गिरनी चाहिए।
मवई में गहराया बिजली संकट, त्राहि-त्राहि
डैनी धुर्वे की मौत के मामले के बीच मवई क्षेत्र में 28 अक्टूबर की दोपहर से अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। 29 अक्टूबर को दिनभर बिजली न होने से पेयजल, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ ग्रामीण इस अघोषित बिजली कटौती को डैनी मामले से जोड़कर देख रहे हैं। यदि यह तकनीकी खराबी है, तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आम जनता किसी विभागीय निष्क्रियता का खामियाजा क्यों भुगते?
शासन से की प्रमुख मांगें
आउटसोर्स कर्मचारी की मौत के मामले में शासन से मांग की है कि घटना की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो और सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। पीडि़त परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। नायब तहसीलदार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव की प्रति परिवार को तत्काल दी जाए। मवई क्षेत्र में अविलंब बिजली आपूर्ति बहाल की जाए और कटौती का कारण सार्वजनिक हो।










