श्राद्ध द्वारा की जाएगी पितृऋण की अदायगी

श्राद्ध द्वारा की जाएगी पितृऋण की अदायगी

पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर

  • तर्पण कर किया जायेगा पूर्वजों का पुण्य स्मरण
  • नर्मदा घाटों में लगेगी आस्था की डुबकी

मंडला महावीर न्यूज 29. आज से पितृपक्ष प्रारंभ हो रहा है। पितृपक्ष प्रारंभ होते ही नर्मदा के विभिन्न घाटों में सनातन धर्मावलंबियों द्वारा अपने पूर्वजों की तृप्ति के लिए दान, पुण्य और दिवंगत आत्माओं को जल तर्पण किया जायेगा। पन्द्रह दिनों तक पितरों का तर्पण किया जाएगा। धार्मिक, मांगलिक कार्य नहीं होंगे। बाजारों में खरीदारी पर भी असर पड़ेगा। पितृपक्ष संपन्न होने के बाद नवरात्र पर्व के साथ बाजार में रौनक लौटेगी। 15 दिनों तक लोग अपने अपने पूर्वजों का श्रृाद्ध करेंगे। दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अनुष्ठान किए जाएंगे। पितरों के तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं। बताया गया कि जिस तिथि को व्यक्ति का निधन होता है उसी तिथि को उसका श्रृाद्ध करने की परंपरा है। श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होते है। पूर्वजों की कृपा मनुष्य पर हमेशा बनी रहती है।

जानकारी अनुसार बहुत से शहरवासी अपनी सुविधानुसार घरों में पितृपक्ष के दिनों में परात में पानी भरकर पूर्वजों को कुशा का धारण कर शहद, दूध अर्पित करने के बाद उन्हें पांच भागों में भोजन अर्पित करते है, लेकिन अभी भी ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जो नर्मदा के घाटों में जाकर पंडितों के जरिए पितृपक्ष के अनुष्ठान रोजाना सम्पन्न कराते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो आज घर से लेकर नदी तक आमजनों द्वारा अपने-अपने पूर्वजों, दिवंगत परिजनों का लगातार स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा के फूल समर्पित करते हुए उनका आशीर्वाद ग्रहण किया जाएगा। पितृपक्ष की तैयारियों में महिला, पुरूष व्यस्त नजर आए, वहीं बाजार में पितृपक्ष के लिए जरूरी सामग्री खरीदने वालों की भीड़ नजर आ रही थी।बताया गया कि पितृपक्ष के पूरे कार्यक्रम महत्वपूर्ण होते हैं। इसी अवधि में घरों में श्राद्ध आदि के कार्य भी साथ ही चलते है। लोगों की कोशिश रहती है कि व्यस्त जिंदगी में पितरों की आत्मा की शांति के लिए किये जा रहे सभी काम निश्चित समय पर हों। उन्होंने मांग की है कि इस परिप्रेक्ष्य में जरूरी है कि सुबह जलापूर्ति में विलम्ब न किया जाए और नर्मदा नदी के घाटों की 15 दिन तक नियमित साफ-सफाई कराने की व्यवस्था की जाए, जिससे वहां पूर्वजों को जल तर्पण करने जाने वाले शहरवासियों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

पितृ पक्ष श्राद्ध हिंदुओं द्वारा अपने पूर्वजों को याद करने के लिए 15 दिनों का एक अनुष्ठान है। पितृ पक्ष के दौरान मृतक का सबसे बड़ा पुत्र पितृलोक में रहने वाले पूर्वजों के लिए तर्पण करके श्राद्ध करता है। पितृ पक्ष या श्राद्ध भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दौरान शुरू होता है और इस वर्ष यह पितृ पक्ष आज 27 सितंबर से शुरू हो रहा है। पितृ पक्ष 10 अक्टूबर को कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि में समाप्त होगा। बताया गया कि पितृपक्ष अश्विन अमावस्या पर खत्म होते हैं, इसे सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं।

नहीं हो रहे कौओं के दर्शन 

तर्पण के बाद घर की छतों में कौआ को भोजन कराना इस सोच पर आधारित है कि पक्षियों के माध्यम से यह भोज्य पदार्थ पूर्वजों तक पहुंचेगा। पर्यावरण की दृष्टि से यह परम्परा पक्षियों के लिए पोषण आहार उपलब्ध कराती है, लेकिन अब शहरों में कौओं के दर्शन अब दुर्लभ होते जा रहे है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में आने वाली कमी पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय है। पितृपक्ष पक्षियों की संख्या मापने का भी एक साधन हो सकता है।


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