लोकायुक्त का एक्शन, रिश्वतकांड के बाद मंडला में हड़कंप
मंडला नपा सीएमओ 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
- बिल भुगतान के एवज में मांगी थी घूस
- 4 लाख की थी डिमांड, 2 लाख लेते धरे गए सीएमओ गजानन नाफड़े
- स्थानीय लोगों ने अन्य भ्रष्ट कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की उठाई मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मंडला नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजानन नाफड़े को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त की टीम ने यह ट्रैप कार्रवाई सीधे नगर पालिका कार्यालय में अंजाम दी।
जानकारी अनुसार लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जबलपुर जिले के ग्राम पिंडरई निवासी 57 वर्षीय ठेकेदार ज्ञानचंद बेन ने शिकायत दर्ज कराई थी। ज्ञानचंद और उनकी पत्नी मंजू बेन एमएस पलक बेन फर्म शासकीय पंजीकृत ठेकेदार हैं। उनकी फर्म को मंडला नगर पालिका में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए एलईडी लाइट, फिटकरी, पाइप जॉइंट और वाटर कूलर सप्लाई का ठेका मिला था।
लोकायुक्त को की गई शिकायत में बताया गया कि ठेकेदार की पत्नी की फर्म के 39 लाख 23 हजार रुपये के बिल का भुगतान हो चुका था। इसके बाद जब ज्ञानचंद अपने 15 लाख रुपये के बकाया भुगतान के लिए सीएमओ गजानन नाफड़े से मिले, तो अधिकारी ने पहले पास किए गए बिलों की 12 प्रतिशत राशि यानी करीब 4 लाख रुपये रिश्वत के तौर पर मांगे।
कार्यालय में ही लिए 2 लाख रुपये, टीम ने दबोचा
शिकायत के सत्यापन के दौरान तय हुआ कि ठेकेदार पहली किश्त के रूप में 2 लाख रुपये देगा। शुक्रवार को जैसे ही ज्ञानचंद ने नगर पालिका कार्यालय में सीएमओ को 2 लाख रुपये सौंपे, पहले से मुस्तैद लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। लोकायुक्त निरीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस ट्रैप दल में टीएलओ निरीक्षक राहुल गजभिए, निरीक्षक जितेंद्र यादव और निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया सहित पूरी टीम शामिल रही।
आम जनता में आक्रोश, अन्य कर्मचारियों पर भी उठे सवाल
सीएमओ के रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद पूरे नगर पालिका महकमे में हड़कंप मच गया है। वहीं स्थानीय लोगों में व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि नगर पालिका में ऐसे कई कर्मचारी हैं, जो बिना लेन-देन के आम जनता और हितग्राहियों का कोई काम नहीं करते। हितग्राही अपना काम कराने के लिए दफ्तरों में भटकने को मजबूर हैं। शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अन्य भ्रष्ट कर्मचारियों को भी चिह्नित कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।










