अस्पताल की अव्यवस्था और डॉक्टर के अभद्र व्यवहार पर भड़के जनप्रतिनिधि
घुघरी में ऑटो पलटने से 16 स्कूली बच्चे घायल
- 4 घंटे की देरी से पहुंची एंबुलेंस, विधायक और नेताओं से बदसलूकी
- घुघरी अस्पताल की बदहाली और स्कूली परिवहन सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के घुघरी स्थित बनेहरी ग्राम में शनिवार शाम सड़क हादसा हो गया। जिसमें स्कूली बच्चों से भरा एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में 16 मासूम बच्चे घायल हो गए। हादसे के बाद बच्चों को तुरंत घुघरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, लेकिन वहां की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, एंबुलेंस की देरी और मौजूद डॉक्टर के कथित अभद्र व्यवहार ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
जानकारी अनुसार शनिवार शाम स्कूल की छुट्टी के बाद संदीपनी विद्यालय, मॉडल विद्यालय एवं क्राइस्ट ज्योति विद्यालय के छात्र एक ही ऑटो में सवार होकर अपने घर लौट रहे थे। बनेहरी ग्राम के समीप यह ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय ग्रामीण और घुघरी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंचे और तत्परता दिखाते हुए सभी घायल बच्चों को घुघरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। ग्रामीणों का आरोप है कि ऑटो चालक शराब के नशे में था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। हालांकि पुलिस का कहना है कि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
4 घंटे तक तड़पते रहे बच्चे, नहीं मिली एंबुलेंस
घायल बच्चों के अस्पताल पहुंचते ही स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली उजागर हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में न तो पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ मौजूद था और न ही आपातकालीन सुविधाएं। शनिवार होने के बावजूद अस्पताल में केवल एक ही डॉक्टर ड्यूटी पर तैनात था, जबकि खंड चिकित्सा अधिकारी अवकाश पर थे। शाम करीब 5.30 बजे घायल बच्चों को अस्पताल लाया गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बच्चों को जिला अस्पताल मंडला रेफर कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद एंबुलेंस की व्यवस्था करने में स्वास्थ्य प्रबंधन पूरी तरह नाकाम रहा। करीब चार घंटे के लंबे और कष्टदायी इंतजार के बाद रात 9.30 बजे के आसपास एंबुलेंस अस्पताल पहुंची। इस घोर लापरवाही से परेशान होकर तीन बच्चों के परिजन अपनी निजी व्यवस्था से वाहन लेकर मंडला के लिए रवाना हुए। रात 10 बजे तक प्रशासन की मौजूदगी में सभी 16 बच्चों को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
विधायक और नेताओं के साथ डॉक्टर का अभद्र व्यवहार
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक बिछिया नारायण सिंह पट्टा घायल बच्चों का हाल जानने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघरी पहुंचे। आरोप है कि जब विधायक ने बच्चों के इलाज को लेकर जानकारी चाही, तो अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर ने उनके, पत्रकारों और स्थानीय ग्रामीणों के साथ अनुचित और अभद्र व्यवहार किया। इस रवैये से नाराज विधायक ने तत्काल जिला कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर चर्चा की और बच्चों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस पूरी घटना पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। जीजीपी के ब्लॉक प्रवक्ता रोहित मरकाम जब अस्पताल पहुंचे और बच्चों के उपचार को लेकर जानकारी मांगी, तो डॉक्टर ने उनके साथ भी गलत व्यवहार किया। पार्टी ने इसे आदिवासी बच्चों के प्रति गंभीर लापरवाही बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि संबंधित डॉक्टर को तत्काल नहीं हटाया गया, तो क्षेत्र में उग्र आंदोलन किया जाएगा। देर रात घटना की जानकारी मिलने पर जीजीपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं मंडला जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश तेकाम सीधे जिला अस्पताल मंडला पहुंचे। उन्होंने घायल बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उनका ढांढस बंधाया और चिकित्सकों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने आपातकालीन सेवा में हुई देरी को अमानवीय बताते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।
एक छात्र की हालत गंभीर, जबलपुर रेफर
जिला अस्पताल मंडला में सभी बच्चों का सघन उपचार जारी है। हालांकि सिर और शरीर में गंभीर चोटें आने के कारण एक बालक की स्थिति नाजुक बनी हुई थी, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए रात में ही मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया गया है।
स्कूली वाहनों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर स्कूली बच्चों के परिवहन से जुड़े सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। एक छोटे से ऑटो में तीन अलग-अलग स्कूलों के 16 बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाना सीधे तौर पर यातायात नियमों का उल्लंघन है। घटना के बाद से आम जनता और अभिभावकों द्वारा स्कूली वाहनों की क्षमता, फिटनेस और सुरक्षा मानकों की नियमित चेकिंग की मांग तेज हो गई है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में एक साथ 16 घायल बच्चों के पहुंचने पर जिस तरह से स्वास्थ्य व्यवस्था ने दम तोड़ा, उसने प्रशासन की बड़ी विफलता को सामने ला दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन दोषी चालक और लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों पर क्या कार्रवाई करता है।
इनका कहना है
मेरे क्षेत्र में शनिवार को ऑटो पलटने से हादसा हुआ था, जिसको लेकर मैं स्वयं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघरी गया था। वहां पर मौजूद डॉक्टर द्वारा पत्रकारों, मुझसे और ग्रामीणों से गलत रवैये से बात की जा रही थी। इसको लेकर मैंने नाराजगी जताई और जिला कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों से बात की।
नारायण सिंह पट्टा, क्षेत्रीय विधायक, विधानसभा बिछिया
मुझे पत्रकारों एवं परिजनों से जानकारी प्राप्त हुई थी कि अस्पताल में इलाज नहीं हो रहा है और डॉक्टर द्वारा गलत तरीके से व्यवहार किया जा रहा है। इसको लेकर मैंने अधिकारियों से बात की। मैं स्वयं जिला अस्पताल मंडला में उपस्थित था और गंभीर रूप से घायल एक बच्चे को मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कराया।
कमलेश तेकाम, प्रदेश अध्यक्ष, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष, मंडला
हमारे कार्यकर्ताओं और समाजसेवी होने के नाते हमने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाकर बच्चों के इलाज को लेकर डॉक्टर से बात की, लेकिन वहां डॉक्टर द्वारा बेहद गलत तरीके से व्यवहार किया गया। यदि इन पर कार्रवाई नहीं हुई तो हम आंदोलन करेंगे।
रोहित मरकाम, ब्लॉक प्रवक्ता, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, घुघरी










