अस्तित्व बचाने की जंग
हजारों पेड़ों की कटाई के खिलाफ कलेक्टर की शरण में मानिकपुर के ग्रामीण
- जांच का भरोसा
- सागौन रोपण के नाम पर उजाड़ा जा रहा प्राकृतिक चारागाह
- सैकड़ों ग्रामीणों ने घेरा जनसुनवाई
- कटाई रोकने की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. बिछिया विकासखंड के सुरपन नदी घाटी क्षेत्र में स्थित मानिकपुर रैयत के ग्रामीण अपने पारंपरिक ‘सतकठा’ जंगल को बचाने के लिए पिछले 10 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। मंगलवार को मानिकपुर रैयत, छिछारी, बनिया गांव, उमरडीही और चरगांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और वन विभाग द्वारा की जा रही पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई। इस मामले में कलेक्टर ने गंभीरता दिखाते हुए जांच कराने का भरोसा दिलाया है।
आजीविका और पर्यावरण पर सीधा प्रहार
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विकास निगम के मोहगांव प्रोजेक्ट (कक्ष क्रमांक 762 एवं 237) के तहत 32 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हजारों पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। वन विभाग द्वारा चार, तेंदू, भिलवा, हर्रा, बहेरा, आंवला, बेल और महुआ जैसे फलदार व औषधीय वृक्षों पर मार्किंग कर ली गई है। ग्रामीण देवकी उइके ने बताया कि ये वृक्ष स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार हैं; तेंदूपत्ता, कंद-मूल और औषधियों से ही उनका जीवनयापन चलता है।
सागौन रोपण से गहराएगा संकट
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि घने प्राकृतिक वन को काटकर सागौन लगाने से कई समस्याएं खड़ी होंगी:
- पशुओं के चारे का अभाव: सागौन के पेड़ों के नीचे घास और चारा नहीं उगता, जिससे पालतू मवेशियों के लिए चारागाह खत्म हो जाएगा।
- गिरता जल स्तर: वन क्षेत्र मैदान में तब्दील होने से क्षेत्र का भू-जल स्तर तेजी से घटेगा।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष: प्राकृतिक आवास नष्ट होने पर जंगली जानवर भोजन की तलाश में सीधे किसानों के खेतों में पहुंचेंगे और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाएंगे।
एकजुट हुआ जनमानस
बिछिया विचार मंच, सुरपन फेडरेशन और अन्य नदी घाटी संगठनों ने भी इस कटाई का पुरजोर विरोध किया है। जनसुनवाई के दौरान हरिप्रसाद, रामप्रसाद, शंकर लाल, ईंदल, रामदीन, यशोदा, संतलाल, पहलवती मरावी, गीता, अनीता यादव और अन्य ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग की इस कार्यवाही को तत्काल रद्द कर प्राकृतिक जंगल को सुरक्षित घोषित किया जाए।











