ग्रामीणों ने कहा किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे अपनी जमीन

चुटका परमाणु परियोजना

विस्थापन की भ्रामक खबर पर ग्रामीणों में आक्रोश

  • ग्रामीणों ने कहा किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे अपनी जमीन
  • चुटका संघर्ष समिति ने मंडला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
  • विकिरण के खतरों पर जताई चिंता, सार्वजनिक संवाद की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर विगत दिवस 7 सितंबर को जबलपुर से प्रकाशित एक समाचार पर चुटका एवं परियोजना प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति जताई है। ग्रामीणों ने इस खबर को भ्रामक और जमीनी हकीकत के विपरीत बताते हुए स्पष्ट किया है कि अधिकांश ग्रामीण आज भी अपने मूल गांवों में रह रहे हैं। अपनी मांगों और आपत्तियों को लेकर प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को मंडला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर की अनुपस्थिति में डिप्टी कलेक्टर सचिन जैन ने ज्ञापन लिया और प्रतिनिधिमंडल को इसे उचित स्तर पर पहुंचाने का आश्वासन दिया।बताया गया कि चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि कुछ भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास स्थल पर जाने का यह मतलब निकालना गलत है कि अधिकांश प्रभावित परिवारों ने गांव छोड़ दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के पक्ष में ग्रामवासियों की कोई सामूहिक सहमति नहीं हुई है। समाचार में विस्थापितों को राहत मिलने और काम शुरू होने की तैयारी की बात कहकर यह गलत संदेश दिया जा रहा है कि प्रभावित ग्रामीणों ने परियोजना को स्वीकार कर लिया है।

मुआवजा नहीं, अधिकारों और पर्यावरण की चिंता

परियोजना प्रभावित परिवारों का कहना है कि चुटका केवल उनके रहने की जगह नहीं है, बल्कि यह उनकी जमीन, जंगल, जलस्रोत, सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और आजीविका से गहराई से जुड़ा है। उनका यह विरोध किसी व्यक्तिगत मुआवजे या आर्थिक लाभ के लिए नहीं है, बल्कि अपने जीवन, पर्यावरण और आने वाली पीढिय़ों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। ग्रामीणों ने परमाणु परियोजना से जुड़े विकिरण, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी संभावित जोखिमों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसके स्वतंत्र आकलन की मांग की है।

प्रशासन से ग्रामीणों ने की प्रमुख मांगें 

ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांगें की गई हैं कि कुछ भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास स्थल पर जाने को पूरे प्रभावित समुदाय का विस्थापन या परियोजना की स्वीकृति न माना जाए। गांव, जंगल और जमीन नहीं छोडऩे के सामूहिक संकल्प और ग्रामसभा की आपत्तियों को आधिकारिक अभिलेख में दर्ज किया जाए। ग्रामीणों की स्पष्ट और स्वतंत्र सहमति के बिना ऐसी कोई भी कार्रवाई न की जाए जिससे उनके अधिकार प्रभावित हों। परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय, स्वास्थ्य और विकिरण जोखिमों की पारदर्शी जानकारी ग्रामीणों को दी जाए और आपत्तियों पर सार्वजनिक संवाद हो।

ज्ञापन सौंपने के दौरान ये रहे उपस्थित 

कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के दौरान चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादु लाल कुड़ापे, महिला मोर्चा अध्यक्ष मीरा बाई मरावी, बराती लाल बरकड़े, दयाल सिंह काकोडिय़ा, डूमारी लाल बरकड़े, वेद प्रकाश यादव, लखन बर्मन, सोना बाई बरकड़े, गौरा बाई तिलगाम, मुन्नी बाई काकोडिय़ा, भागवती बाई कुड़ापे, सेववती तेकाम, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन जबलपुर के विवेक अवस्थी, बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा और सरमन रजक सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे।


 

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