10 साल से लटका स्कूल का अतिरिक्त कक्ष
- बच्चों की पढ़ाई पेड़ों और तंबू के नीचे, पोर्टल से गायब हुई स्वीकृत राशि
- कैबिनेट मंत्री का विधानसभा क्षेत्र, फिर भी बदहाल प्राथमिक शाला
- बुजबुजिया के मासूम असुरक्षित भवन और सरकारी उपेक्षा का शिकार
- गजब है जिले की शिक्षा व्यवस्था, दशकों बाद भी नहीं बना स्कूल का अतिरिक्त कक्ष
मंडला महावीर न्यूज 29. जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर मंडला जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सिलपुरा के पोषक ग्राम बुजबुजिया स्थित प्राथमिक शाला की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्कूल का भवन जर्जर और बदहाल होने के कारण यहां के ग्रामीण बच्चे आज भी तिरपाल और लकड़ी की बल्लियों से निर्मित एक अस्थायी झोपड़ीनुमा तंबू में या खुले आसमान के नीचे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
जानकारी अनुसार यह स्थिति तब है जब स्कूल के लिए एक अतिरिक्त कक्ष के निर्माण हेतु वर्ष 2012-13 में ही शासन द्वारा लगभग 3 लाख रुपए की राश्यिा स्वीकृत की गई थी। वहीं विभागीय व्यवस्था के तहत निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सिलपुरा को सौंपी गई थी और लगभग 1 लाख 43 हजार रुपए की राशि निर्माण एजेंसी के खाते में हस्तांतरित भी कर दी गई थी।
राशि आवंटित, फिर भी निर्माण ठप
जिले का दुर्भाग्य यह है कि पूरा एक दशक गुजर जाने के बाद भी आज तक इस अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। इस मामले में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि उक्त निर्माण कार्य को विभागीय पोर्टल से विलोपत कर दिया गया है। यह एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है कि जब राशि आवंटित और निर्माण एजेंसी के खाते में जमा हो चुकी थी, तो बिना कार्य कराए इसे पोर्टल से कैसे हटा दिया गया? ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, जिससे वास्तविक स्थिति और दोषी अधिकारियों, एजेंसियों का पता चल सके।
बच्चों की मजबूरी, कभी आंगनवाड़ी तो कभी पेड़ के नीचे पढऩे मजबूर
इस गंभीर लापरवाही का सीधा परिणाम मासूम ग्रामीण बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। जर्जर भवन में बैठना खतरे से खाली नहीं होने के कारण बच्चों को कभी आंगनवाड़ी केन्द्र में, कभी रंगमंच पर, कभी पेड़ के नीचे खुले आसमान तले और वर्तमान में पन्नी व तिरपाल से बने अस्थायी तंबू में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। ग्रामवासियों ने बताया कि यह समस्या बीते पांच सालों से लगातार सुर्खियों में रही है, लेकिन विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कोई ठोस समाधान नहीं निकाला। चुनाव के समय दिए गए आश्वासन भी आज तक केवल कोरे वादे ही साबित हुए हैं।
कैबिनेट मंत्री का क्षेत्र, फिर भी उपेक्षा
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह क्षेत्र मंडला विधानसभा के अंतर्गत आता है, जिसकी विधायक वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण एजेंसी पर तत्काल कार्रवाई की जाए लेकिन इससे अधिक जिम्मेदारी जिला शिक्षा केन्द्र की बनती है, जिसने राशि उपलब्ध कराने के बाद भी न तो समय पर निरीक्षण किया और न ही कार्य प्रगति की समीक्षा की। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और स्कूल भवन का निर्माण तत्काल प्रारंभ कराने की मांग की है, जिससे बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा मिल सके।
इनका कहना है
विभागीय अधिकारियों द्वारा जर्जर भवन में स्कूल संचालन पर रोक लगाए जाने के बाद ग्राम में वैकल्पिक भवन उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीणजन स्वयं तिरपाल लगाकर बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था कर रहे हैं। अस्थायी व्यवस्था होने से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। शीघ्र ही सुरक्षित व उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है।
बचन सिंह मरावी, शिक्षक, प्रा.शा. बुजबुजिया, सिलपुरा
पंचायत स्तर से लेकर जनपद पंचायत, विधायक, सांसद, मंत्री और जिला प्रशासन तक बार-बार शिकायतें की गईं, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई। अफसरों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ही यह हालात बने हैं, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और निराशा है।
नरेश मार्को, सरपंच, ग्राम पंचायत सिलपुरा, मंडला









