मवई के वनांचल में पहली बार लहलहाई बासमती धान की फसल

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मवई के वनांचल में पहली बार लहलहाई बासमती धान की फसल

किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

  • उद्योगिनी संस्था की पहल लाई रंग
  • 8 गांवों के 28 किसानों ने अपनाया नवाचार
  • बीज के लिए तीन साल तक नहीं होगी निर्भरता

मंडला महावीर न्यूज 29.  कृषि, वनोपज और मजदूरी पर निर्भर रहने वाले मवई वनांचल क्षेत्र के किसानों के लिए यह वर्ष एक सुखद बदलाव लेकर आया है। सिंचाई के सीमित साधनों के कारण जो किसान अब तक केवल ‘1010’ या हल्की किस्मों की पारंपरिक धान उगाने को मजबूर थे, आज उनके खेतों में खुशबूदार ‘बासमती धान’ की फसल लहलहा रही है। यह सकारात्मक बदलाव ‘उद्योगिनी संस्था’ द्वारा किए गए कृषि नवाचार और किसानों की कड़ी मेहनत का परिणाम है।

280 किलो प्रजनक बीज का किया गया था वितरण

जानकारी अनुसार उद्योगिनी संस्था ने क्षेत्र में कृषि को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की थी। इसके तहत मवई विकासखंड के 8 अलग-अलग गांवों के 28 चयनित किसानों को कुल 280 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला बासमती धान का प्रजनक (ब्रीडर) बीज निःशुल्क वितरित किया गया। बीज देने के साथ ही संस्था ने किसानों को नई तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया और अन्य स्थानों पर चल रही बासमती धान की खेती का ‘एक्सपोजर विजिट’ कराकर उन्हें प्रेरित किया।

मेहनत रंग लाई, अन्य किसान भी हुए उत्साहित

किसानों की लगन और संस्था के उचित मार्गदर्शन का असर अब खेतों में साफ नजर आ रहा है। पहली बार बासमती धान उगाने वाले किसानों के खेतों में सुनहरी फसल लहलहा रही है, जिसे देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। इस वर्ष ग्राम रामतिला, सुनहरा, मसाना, मुड़ता, सरसडोली, डोली, सूरजपुर और हर्राटोला के किसानों ने बासमती धान की खेती की है। इनकी शानदार फसल को देखकर अब आसपास के अन्य किसान भी काफी उत्साहित हैं और अगले वर्ष से इस नवाचार को अपनाने की योजना बना रहे हैं।

बीज के मामले में आत्मनिर्भर बनेंगे किसान

इस कृषि नवाचार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल एक सीजन की सफलता नहीं है। संस्था के अनुसार, इन 28 किसानों को जो फसल प्राप्त होगी, वे उस उपज का उपयोग आगामी तीन वर्षों तक ‘बीज’ के रूप में कर सकेंगे। इससे उन्हें हर साल नए बीज खरीदने के लिए बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत में भी कमी आएगी।

उद्योगिनी संस्था की इस महत्वपूर्ण पहल ने वनांचल क्षेत्र के किसानों के सामने खेती में विविधता लाने और पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर अपनी आय बढ़ाने के नए दरवाजे खोल दिए हैं।


रिपोर्टर- संदीप श्रीवास, मवई


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