गणेश विसर्जन में नहीं लगता पंचक का दोष
- अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को लगाएं लाई, पान और अदरक का भोग
- 25 तारीख को रात्रि 10.09 बजे तक ही कर लें गणेश विसर्जन, इसके बाद शुरू हो जाएगा पितृ पक्ष
मंडला महावीर न्यूज 29. इस वर्ष गणेशोत्सव 12 दिनों का मनाया जा रहा है, जिसके चलते श्री गणेश विसर्जन के मुहूर्त को लेकर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ज्योतिष एवं धर्म शास्त्रों के जानकार पंडित नीलू महाराज ने बताया कि इस बार श्री गणेश जी का विसर्जन 25 तारीख को ही किया जाना चाहिए। विसर्जन का यह कार्य हर हाल में सुबह 10 बजकर 9 मिनट तक संपन्न कर लेना अनिवार्य है।
पंडित नीलू महाराज ने बताया कि 25 तारीख को रात्रि 10 बजकर 9 मिनट के बाद पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। पूर्णिमा के लगते ही पितृ पक्ष का भी प्रारंभ हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष में गणेश विसर्जन करना दोषपूर्ण, अनिष्टकारी और अशास्त्रोक्त माना गया है। इसलिए पितृ पक्ष में गणेश विसर्जन न करें। पूर्णिमा से ही पूर्वजों का तर्पण प्रारंभ कर देना चाहिए, क्योंकि श्राद्ध के 16 दिन होते हैं जिसे षोडषी श्राद्ध कहा जाता है।
पंचक दोष की चिंता न करें
विसर्जन को लेकर एक संशय पंचक का भी था। 23 तारीख की रात्रि 9 बजकर 26 मिनट से ही पंचक लग चुके हैं। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश विसर्जन, देव पूजन और देवी-देवताओं की विदाई जैसे शुभ कार्यों में पंचक का दोष नहीं माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु बिना किसी संशय के 25 तारीख की सुबह तक विसर्जन कर सकते हैं।
अनंत चतुर्दशी पूजन विधि और विशेष भोग
अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर भगवान श्री गणेश की विदाई से पूर्व उनकी विशेष पूजा अर्चना की जानी चाहिए। इस दिन भगवान गणेश का पूजन, गजाननाय नम: मंत्र के उच्चारण के साथ करना अत्यंत फलदायी है। विसर्जन से पूर्व बप्पा को धान की लाई, पान और अदरक के टुकड़ों का विशेष भोग अवश्य अर्पित करें।









