मिड-डे मील का भुगतान महीनों से अटका, उधारी पर चल रही रसोई

मिड-डे मील का भुगतान महीनों से अटका, उधारी पर चल रही रसोई

समूहों ने दी चूल्हा बंद हड़ताल की चेतावनी

  • कर्ज लेकर बच्चों का पेट भर रहीं महिलाएं
  • आदिवासी बाहुल्य मंडला में पीएम पोषण योजना बेपटरी
  • मानदेय न मिलने पर रसोईयों में आक्रोश, प्रशासन से पूछे 5 तीखे सवाल

मंडला महावीर न्यूज 29.  शिक्षा सत्र 2026-27 शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में पीएम पोषण शक्ति योजना (मिड-डे मील) बेपटरी नजर आ रही है। स्व-सहायता समूहों और रसोईयों का भुगतान महीनों से लंबित होने के कारण भारी आक्रोश है। जिला पंचायत, कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन सौंपने के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला है, जिसके चलते समूहों के लिए बच्चों को मीनू के अनुसार भोजन परोसना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
स्व-सहायता समूहों के संचालकों का कहना है कि सत्र की शुरुआत से अब तक लागत राशि की एक भी किस्त जारी नहीं हुई है। सब्जी, तेल, मसाला और ईंधन उधारी पर लाना पड़ रहा है और अब दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है। मजबूरी में महिलाओं को कर्ज लेना पड़ रहा है। दूसरी ओर महज 4 हजार रुपये के मानदेय पर काम करने वाली रसोईयों को भी ढाई महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जून माह का मानदेय तो पिछले 5-6 सालों से अटका हुआ है।

प्रशासन से पूछे सवाल, दी हड़ताल की चेतावनी 

लगातार अनदेखी से नाराज समूहों और रसोईयों ने प्रशासन से 5 तीखे सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा है कि बजट का आवंटन समय पर क्यों नहीं हो रहा है, क्या सरकार चाहती है कि गरीब महिलाएं कर्ज लेकर बच्चों का पेट भरें, और बिना भुगतान के भोजन की गुणवत्ता की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि अंतिम तिथि घोषित कर जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो वे चूल्हा बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होंगे।

इनका कहना है

समय पर भुगतान न होने से मीनू आधारित भोजन देना चुनौतीपूर्ण है। समूहों और रसोईयों की आर्थिक स्थिति खराब बनी हुई है। आवेदन-निवेदन का भी कोई असर नहीं हुआ, अब आंदोलन ही अंतिम विकल्प है।


पीडी खैरवार, संयोजक, रसोईया उत्थान संघ समिति, मंडला


Leave a Comment