नियम विरुद्ध तबादले करने वाले तत्कालीन अधिकारियों पर हो सख्त कार्रवाई
मंडला में शिक्षकों के तबादलों को निरस्त करना प्रशासन का साहसिक कदम
- जिले भर के शिक्षा विभाग में मची खलबली
- अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग कर शून्य शिक्षकीय शालाओं में पदस्थापना का दिया सुझाव
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले में अतिशेष शिक्षकों और अवैध स्थानान्तरण को लेकर कलेक्टर और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी किए गए सख्त आदेश के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन का यह कदम उन शिक्षकों पर केंद्रित है, जिन्हें नियमों को ताक पर रखकर दूरस्थ क्षेत्रों से मंडला नगर, बीजाडांडी रोड और नैनपुर ब्लॉक की सुगम शालाओं में पदस्थ किया गया था। इस मनमानी प्रक्रिया के कारण घुघरी, मवई, मोहगांव और निवास जैसे दूरस्थ ब्लॉक लगभग शिक्षक विहीन हो गए हैं।
आरोप है कि तत्कालीन सहायक आयुक्तों ने शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नवनियुक्त शिक्षकों की परिवीक्षा अवधि समाप्त होने से पहले ही उनके तबादले कर दिए। इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन से पूर्व सहायक आयुक्तों के खिलाफ धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन का प्रस्ताव शासन को भेजने की मांग उठ रही है। हैरानी की बात यह है कि जब ये अवैध तबादले धड़ल्ले से हो रहे थे, तब शिक्षक संगठनों और राजनेताओं ने मौन साधे रखा। अब आरोप लग रहे हैं कि इन तबादलों में रसूख और पैसे का जमकर खेल हुआ था। जो नेता और संगठन आज बीच सत्र और तिमाही परीक्षा का हवाला देकर कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, उन्होंने अवैध तबादलों के समय ना तो कोई ज्ञापन दिया और ना ही न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
असंतुलित छात्र-शिक्षक अनुपात बनी मुख्य वजह
प्रशासन को यह सख्त कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि वर्तमान में कुछ प्राइमरी स्कूलों में 10-15 बच्चों पर 4-5 शिक्षक और मिडिल स्कूलों में 40-50 बच्चों पर 8-10 शिक्षक जमे हुए हैं और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। ब्लॉक मुख्यालय और सड़क किनारे के स्कूलों में पदस्थ रसूखदार शिक्षक अतिशेष होने के बावजूद रिक्त पदों वाली शालाओं में जाने को तैयार नहीं थे। शिक्षा व्यवस्था की इस गंभीर बीमारी को दूर करने के लिए प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम एक बड़ी सर्जरी के समान माना जा रहा है, जो शुरुआती कष्ट के बाद स्थायी सुधार लाएगा।
मूल शाला वापसी में पेंच और साजिश की आशंका
आदेश के बाद जमीनी स्तर पर कुछ तकनीकी और प्रशासनिक जटिलताएं भी सामने आ रही हैं। अवैध तबादला निरस्त होने पर जो शिक्षक अपनी मूल शाला में लौटेंगे, वहां पहले से ही वैधानिक रूप से अन्य शिक्षक पदस्थ हो चुके हैं। ऐसे में लौटने वाले शिक्षक पुन: अतिशेष की श्रेणी में आ जाएंगे और उन्हें किसी तीसरी शाला में जाना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर यह आरोप भी लग रहा है कि वे गैर-जरूरी स्थानीय संलग्नीकरणों को भी अवैध तबादलों की सूची में शामिल कर मामले को जानबूझकर पेंचीदा बना रहे हैं। इसका उद्देश्य जानबूझकर अव्यवस्था फैलाना माना जा रहा है, जिससे शिक्षकों में रोष पनपे और इस पूरी कार्रवाई पर न्यायालय से स्टे लगवाया जा सके।

अपाक्स मंडला
समाधान के लिए निष्पक्ष काउंसलिंग का दिया सुझाव
अपाक्स मंडला के जिला अध्यक्ष संजीव सोनी का कहना है कि छात्र हित में उठाए गए इस कदम को पूरी तरह सफल बनाने के लिए यह सुझाव सामने आ रहा है कि जो शिक्षक अवैध तबादले के बावजूद वर्तमान शाला में अतिशेष की श्रेणी में नहीं आ रहे हैं, उन्हें वहीं पदस्थ रहने दिया जाए। वहीं, जो अवैध तबादले वाले शिक्षक अतिशेष में आ रहे हैं, उन्हें निष्पक्ष काउंसलिंग के माध्यम से सर्वप्रथम शून्य शिक्षकीय स्कूलों में और उसके बाद नजदीकी रिक्त स्कूलों में पदस्थ किया जाए। इसके लिए विकासखंड और जिला मुख्यालय स्तर पर कर्मठ अधिकारियों की एक टीम बनाकर सभी स्कूलों की पदस्थापना का डेटा विश्लेषित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में जमे अतिशेष शिक्षकों को भी अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए स्वेच्छा से रिक्त पदों वाले स्कूलों में जाना चाहिए, जिससे निर्दोष शिक्षकों को व्यवस्थागत खामियों का खामियाजा न भुगतना पड़े।










