जनता को स्वच्छता का नोटिस, लेकिन जंगल किनारे पंचायत का कचरा
- मवई में कचरा प्रबंधन पर खड़े हुए गंभीर सवाल
- पर्यावरण और वन्यजीवों पर मंडराया खतरा
मंडला महावीर न्यूज 29. ग्राम पंचायत मवई द्वारा हाल ही में स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देकर स्वच्छता बनाए रखने का नोटिस जारी किया गया है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने पर 500 रुपये जुर्माना और व्यापारिक लाइसेंस निरस्त करने जैसी कड़ी चेतावनी दी गई है। पंचायत की यह मुहिम कागजों पर जितनी सराहनीय दिख रही है, जमीनी हकीकत में पंचायत का खुद का कचरा प्रबंधन ठीक इसके विपरीत है, जिससे अब स्थानीय प्रशासन की कथनी और करनी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
संवेदनशील स्थानों और जंगल किनारे अवैध डंपिंग
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत द्वारा पूरे क्षेत्र से एकत्रित किया जाने वाला कचरा वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के बजाय खुले में डंप किया जा रहा है। कचरा फेंकने के लिए गांव के एकमात्र खेल मैदान के समीप, विद्यालय के पास और मुक्तिधाम जाने वाले मुख्य मार्ग के किनारे को चुना गया है, जो सीधे वन क्षेत्र की सीमा से सटा हुआ है। इस मार्ग का उपयोग ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए करते हैं, जहां अब दुर्गंध और गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 की सरेआम अवहेलना
नियमों के मुताबिक स्थानीय निकायों और पंचायतों की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, पृथक्करण और सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करें। स्वीकृत और निर्धारित लैंडफिल साइट के अलावा किसी अन्य सार्वजनिक या संवेदनशील स्थान पर कचरा डंप करना पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। नियमों की अनदेखी के कारण देश के कई निकायों पर पूर्व में भारी पर्यावरणीय जुर्माना भी लग चुका है।
वन्यजीवों की जान पर आफत
वन सीमा के नजदीक प्लास्टिक, खाद्य अपशिष्ट और अन्य हानिकारक कचरा फेंकने से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 की मूल भावना को ठेस पहुंच रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों और ग्रामीणों के अनुसार खुले में पड़े इस कचरे से कई गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। भोजन की तलाश में जंगली जानवर और मवेशी अक्सर प्लास्टिक निगल लेते हैं, जिससे उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो सकती है। आबादी और जंगलों के बीच कचरे के ढेर होने से जंगली जानवरों का व्यवहार बदल सकता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढऩे की आशंका है। बरसात के दिनों में यह गंदगी बहकर जल स्रोतों में मिलेगी, जिससे भूजल प्रदूषित होगा। कचरे के ढेर में अचानक आग लगने की स्थिति में भीषण वनाग्नि (जंगल की आग) का जोखिम भी काफी बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने पूछा, क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं
स्थानीय जनता का कहना है कि यदि आम नागरिकों और व्यापारियों पर स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, तो खुद पंचायत प्रशासन इन नियमों से ऊपर कैसे हो सकता है? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि संवेदनशील स्थलों तथा वन सीमा के पास चल रही इस अवैध डंपिंग को तुरंत रोका जाए और पंचायत को वैज्ञानिक पद्धति से स्थायी कचरा निस्तारण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएं।









