मरम्मत के नाम पर करोड़ों के खर्च और तकनीक पर उठे सवाल

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छात्रावासों और स्कूल भवनों पर टीन शेड लगाने का मामला गरमाया

मरम्मत के नाम पर करोड़ों के खर्च और तकनीक पर उठे सवाल

  • ट्राइबल सब प्लान फंड के दुरुपयोग की आशंका
  • जिला शिक्षा समिति अध्यक्ष इंजीनियर ने जांच करने की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों एवं स्कूल भवनों के रखरखाव और मरम्मत के नाम पर किए जा रहे कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भवनों की छतों के ऊपर टीन शेड लगाए जाने की इस योजना और इस पर किए जा रहे भारी-भरकम खर्च की प्रक्रिया अब जिले भर में चर्चा का विषय बन गई है। विभाग के सैकड़ों भवनों पर हो रहे इन निर्माण कार्यों की उपयोगिता, तकनीकी स्वीकृति और बजट के औचित्यहीन उपयोग पर सवाल उठने लगे हैं। जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं शिक्षा समिति के अध्यक्ष ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षण कराने के साथ इस मामले की जांच करने की मांग कर रहे है।जिला पंचायत उपाध्यक्ष द्वारा दी गई जानकारी अनुसार इन कार्यों के संपादन के लिए ट्राइबल सब प्लान फंड से करोड़ों रुपये की राशि खर्च की जा रही है। मामले में जिला शिक्षा समिति के अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई है। उन्होंने टीएसपी फंड से हो रहे इस खर्च की उच्च स्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि जितने भारी बजट में छतों पर टीन शेड लगाए जा रहे हैं, उतने खर्चे में तो भवनों के लिए पक्की दूसरी छत का निर्माण आसानी से कराया जा सकता था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भवनों की वास्तविक आवश्यकताओं का सही आकलन करने के बाद यह कार्य स्वीकृत किए गए हैं।

मरम्मत के नाम पर टीन शेड का औचित्य क्या? 

छात्रावासों और शासकीय स्कूलों की मरम्मत का मुख्य उद्देश्य अध्ययनरत विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना होता है, लेकिन पक्के भवनों की छतों पर टीन शेड लगाने के निर्णय ने विभागीय मंशा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यह जानना अत्यंत आवश्यक हो गया है कि इस तकनीक का चयन किन परिस्थितियों में और किसके आदेश पर किया गया है? क्या छतों से पानी का रिसाव रोकना इसका मुख्य उद्देश्य था, गर्मी से बचाव के लिए यह प्रबंध किया गया है या फिर इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक व तकनीकी कारण है।

प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति पर संशय 

स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की तकनीकी स्वीकृति, विभागीय प्रक्रिया और खर्च की आवश्यकता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय धन का सदुपयोग विद्यार्थियों की सीधी सुविधाओं और ढांचागत मजबूती के लिए होना चाहिए, न कि गैर-जरूरी और अस्थायी निर्माण कार्यों के नाम पर। जिला शिक्षा समिति अध्यक्ष ने कहा कि अब जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच के क्या आदेश जारी करता है।


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