शुभ योग में महिलाएं रखेंगी करवा चौथ में निर्जला व्रत

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शिववास योग के दुर्लभ महासंयोग में सुहागिनें मांगेंगी अखंड सौभाग्य का वरदान

शुभ योग में महिलाएं रखेंगी करवा चौथ में निर्जला व्रत

  • सुख, समृद्धि और पति की लंबी आयु की करेंगी कामना
  • करवा चौथ में भद्रा का साया नहीं
  • महिलाएं कर रही खरीददारी, बाजार में आई रौनक

मंडला महावीर न्यूज 29. सुहागिनों के अखंड सौभाग्य और पति-पत्नी के अटूट प्रेम का प्रतीक करवा चौथ का महापर्व इस वर्ष 29 अक्टूबर को पूरे उल्लास, श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत इस बार अत्यंत शुभ संयोगों के बीच आया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष करवा चौथ पर भद्रा का कोई साया नहीं है, जिससे इस कठिन व्रत का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाएगा। इस खास दिन सिद्धि योग के साथ शिववास योग और चंद्रमा का अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करना एक दुर्लभ महासंयोग बना रहा है।

वरदान आश्रम के संचालक और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राम गोपाल शास्त्री नीलू महाराज ने बताया कि ग्रहों की ऐसी विशेष स्थिति और शुभ योगों में व्रत रखने से न सिर्फ पति की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और अटूट प्रेम भी बना रहता है। ज्योतिष में चंद्रमा को प्रेम और प्रसिद्धि का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि सुहागिन महिलाएं करवा चौथ के दिन चंद्रमा की विशेष पूजा करती हैं, जिससे चंद्रदेव के आशीर्वाद से सारे सद्गुण उनके पति के जीवन में समाहित हो जाएं।

विशेष विधि से करें व्रत पूर्ण 

पंडित नीलू महाराज ने व्रत की पूजन विधि बताते हुए कहा कि महिलाओं को सोलह श्रृंगार कर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाना चाहिए। उस पर करवा चौथ माता की तस्वीर रखकर विधिवत आवाहन, स्नान, चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। व्रत कथा का वाचन करने के बाद पति की उपस्थिति में चंद्रमा का पूजन और दर्शन करना चाहिए। पूजन सामग्री में एक शक्कर का और एक सादा टोंटी वाला करवा रखना अनिवार्य है। पूजा के बाद पति के हाथों से भगवान को निवेदित जल या दूध पीकर ही महिलाओं को अपना व्रत पूर्ण करना चाहिए।

कुंवारी कन्याएं न करें चंद्र दर्शन, पति भी रख सकते हैं व्रत

यह विशेष व्रत सुहागिन महिलाओं के अलावा वे कन्याएं भी रख सकती हैं जिनका विवाह तय हो चुका है। हालांकि कुंवारी कन्याओं के लिए चंद्र दर्शन वर्जित माने गए हैं, वे तारों को देखकर अपना व्रत खोल सकती हैं। इसके अलावा यदि कोई महिला बीमारी या अन्य किसी विवशता के कारण व्रत रखने में असमर्थ है, तो उनके पति भी पत्नी के बेहतर स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए यह व्रत रख सकते हैं।

मंडला के बाजारों में छाई रौनक 

इस महापर्व को लेकर मंडला शहर के बाजारों में खासी रौनक देखने को मिल रही है। पूजन सामग्री, कपड़ों और श्रृंगार के सामान की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ है। सोने के बढ़ते दामों के बावजूद सराफा बाजार में करवा चौथ की चमक बरकरार है। स्थानीय ज्वैलर्स की दुकानों पर महिलाएं लाइट वेट वाली स्टाइलिश सोने और चांदी की ज्वेलरी को अपनी पहली पसंद बना रही हैं।

पति के प्रति पूर्ण समर्पण का है पर्व 

करवा चौथ केवल एक पारंपरिक व्रत नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के मध्य पवित्र बंधन का सबसे बड़ा प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में पति को परमेश्वर का दर्जा दिया गया है। स्त्रियां पूरे दिन का निर्जला व्रत रखकर और सोलह श्रृंगार कर ईश्वर के समक्ष यह प्रण लेती हैं कि वे मन, वचन एवं कर्म से अपने पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेंगी।

मंडला जिले में चंद्रोदय और शुभ मुहूर्त 

पंडित नीलू महाराज ने बताया कि करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय चंद्रमा का उदय होता है। पंचांग के अनुसार इस साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ बुधवार रात्रि अंत और गुरुवार तड़के 04 बजकर 07 मिनट से होगा। चतुर्थी तिथि का समापन गुरुवार 29 अक्टूबर रात्रि 02 बजे तक रहेगा। चतुर्थी उदया तिथि में प्रारंभ होने के कारण यह व्रत समस्त दिन और रात्रि पर्यंत मान्य रहेगा। नीलू महाराज ने बताया कि गुरुवार को मंडला जिले में चंद्रोदय रात्रि 09 बजकर 20 मिनट पर होगा (4 घड़ी उपरांत)। इसी समय चंद्र दर्शन कर महिलाएं अघ्र्य देंगी।

इनका कहना है

प्रतिवर्ष करवा चौथ का व्रत रहते है। इसको लेकर मन में काफी उत्साह रहता है। करवा चौथ की तैयारियां कर ली है। ससुराल और मायके से तो तौहफा मिलेगा ही, अपने हिसाब से भी अपने लिये खरीददारी कर रहे है। ऐसे तो प्रति पल अपने सुहाग की सलामती की कामना करती हूं लेकिन करवा चौथ के दिन विधि-विधान पूर्वक व्रत करके पति से आशीर्वाद लेने के बाद व्रत पूरी करूंगी।


रमाभारती प्रजापति, घुघरी

यह मेरा 18 वां करवा चौथ व्रत है, पहले व्रत में जो उत्साह था वही उत्साह इस 18 वें करवा चौथ को लेकर भी है। समय के साथ परंपराएं कहीं न कहीं और मजबूत हुई है। त्यौहार ग्लोबल हुए हैं। पहले यह पर्व कुछ खास वर्ग तक ही सीमित था। अब हर ओर त्यौहार की खुशियां देखने को मिलता है। करवा चौथ भारतीय संस्कृति में पति के लिए पत्नी के समर्पण भाव को दर्शाता है। इस व्रत को लेकर हम काफी उत्साहित रहते है।


माधुरी कछवाहा, मंडला

प्रतिवर्ष मैं करवा चौथ का व्रत रखती हूं। इस व्रत को लेकर उत्साह भी रहता है, जिसे हम खूब इंज्वाए करते है। पूरा परिवार जब साथ होता है तो त्यौहार की खुशियां चार गुना हो जाती है। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण आसपास की महिलाएं एक साथ नहीं जुट पायेंगी। बावजूद इसके मस्ती में कोई कमी नहीं रहने दिया जाएगा। शाम को पूजा और चांद देखने के बाद पतिदेव के हाथ व्रत पूरा होगा।


सोनिया कछवाहा, मंडला

साल में एक बार आने वाले करवा चौथ को लेकर मन में काफी उत्साह रहता है, सजने, संवरने का मौका एक बार फिर मिलता है। व्रत को लेकर पूरी तैयारियां कर ली है, फिर भी कही कोई कमी ना रह जाए इसकी भी चिंता रहती है। हालांकि बचपन से ही परिवार में इस व्रत और पूजा करते देखती आई हूं। मेरे लिए यह सिर्फ एक व्रत नहीं बल्कि खास दिन है। इस दिन को बेहतरीन तरीके से सेलिब्रेट करूंगी। व्रत के लिए अभी और खरीददारी करेंगे।


शिरोमणी सोनी, नैनपुर


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