शासन के आदेश से मंडला जिला अस्पताल में फिर ईएनटी डॉक्टर का संकट

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शासन के आदेश से मंडला जिला अस्पताल में फिर ईएनटी डॉक्टर का संकट

  • मरीज हो रहे परेशान, बकोरी लौटीं विशेषज्ञ डॉ. सौम्या
  • क्षेत्रीय जनता ने विधायक, सांसद और कैबिनेट मंत्री से की जिला अस्पताल में स्थायी पदस्थापना की गुहार

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं एक बार फिर चरमराती नजर आ रही हैं। शासन के हालिया आदेश के बाद जिला अस्पताल में सेवाएं दे रहीं एकमात्र ईएनटी (नाक, कान, गला) विशेषज्ञ डॉक्टर का अटैचमेंट समाप्त कर दिया गया है। इसके चलते जिले भर के नाक, कान और गले की बीमारियों से पीडि़त मरीजों के सामने एक बार फिर इलाज का बड़ा संकट खड़ा हो गया है और उन्हें मजबूरी में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

जानकारी अनुसार मंडला जिला चिकित्सालय में वर्षों से कोई नियमित ईएनटी विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। लंबे समय तक नाक, कान और गले के मरीजों को छोटी-छोटी समस्याओं और सामान्य जांच के लिए भी जबलपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था। मरीजों की इस बदनसीबी और परेशानी को देखते हुए वर्षों बाद जिले को डॉ. सौम्या के रूप में एक ईएनटी विशेषज्ञ की सौगात मिली थी। हालांकि उनकी मूल पदस्थापना जिले के ग्रामीण क्षेत्र बकोरी में की गई थी, लेकिन संपूर्ण जिले की समसामयिक जरूरत और मरीजों की भारी संख्या को देखते हुए उन्हें मंडला जिला चिकित्सालय में अटैच कर उनकी सेवाएं ली जा रही थीं।

अटैचमेंट ने खत्म कर दिया था मरीजों का भटकाव 

डॉ. सौम्या के जिला चिकित्सालय में सेवाएं देने से न केवल बकोरी बल्कि पूरे मंडला जिले के नाक, कान और गला रोगियों को सीधा लाभ मिल रहा था। जटिल रोगों की पहचान और उनका समुचित इलाज स्थानीय स्तर पर ही आसानी से होने लगा था। मरीजों का जबलपुर की ओर होने वाला भटकाव और अतिरिक्त आर्थिक खर्च पूरी तरह से रुक गया था। स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से यह जिले के लिए एक बड़ी राहत थी।

शासन के आदेश से उत्पन्न हुई विसंगति 

हाल ही में शासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग में सभी प्रकार के अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के सख्त आदेश जारी किए गए हैं। इस आदेश के परिपालन में सभी शासकीय सेवकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जा रहा है। इसी नियम के तहत डॉ. सौम्या को भी जिला अस्पताल से कार्यमुक्त कर उनकी मूल पदस्थापना वाले छोटे ग्राम बकोरी भेज दिया गया है। इस फैसले ने एक बड़ी विसंगति को जन्म दे दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि एक उच्च योग्यता प्राप्त विशेषज्ञ चिकित्सक, जिसकी सेवाएं जिला स्तर पर हजारों मरीजों के लिए नितांत आवश्यक हैं, उसे केवल एक ग्राम पंचायत स्तर तक सीमित कर देना पूरे जिले के मरीजों के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण कदम है।

जनप्रतिनिधियों और कैबिनेट मंत्री से की मांग 

अटैचमेंट खत्म होने के बाद से ही जिला अस्पताल में नाक, कान और गले के मरीज फिर से परेशान होने लगे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिले की जनता और मरीजों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है। नागरिकों ने क्षेत्रीय विधायक, सांसद और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री से पुरजोर मांग की है कि जनता की व्यापक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस मामले में विशेष हस्तक्षेप किया जाए। आमजन की अपील है कि डॉ. सौम्या की स्थायी पदस्थापना मंडला जिला चिकित्सालय में ही करवाई जाए, ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ केवल एक गांव तक सीमित न रहकर पूरे मंडला जिले की पीडि़त जनता को निर्बाध रूप से मिल सके।


 

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