चिया की फसल से हुआ बंपर लाभ

मंडला के किसान तीरथ उईके ने पेश की मिसाल

पारंपरिक गेहूं छोड़ शुरू की चिया की खेती

  • 10 हजार लगाकर कमाया 1.5 लाख का मुनाफा
  • आत्मा योजना ने बदली बम्हनी के किसान की किस्मत
  • चिया की फसल से हुआ बंपर लाभ
  • उत्साहित होकर 4 एकड़ में बढ़ाया रकबा

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के नारायणगंज विकासखंड के ग्राम बम्हनी निवासी किसान तीरथ उईके ने पारंपरिक खेती से हटकर सफलता की एक नई कहानी लिखी है। शासन की ‘आत्मा योजना’ (आर.के.व्ही.वाई.) के तहत तकनीकी मार्गदर्शन और फसल प्रदर्शन का लाभ उठाते हुए उन्होंने पहली बार ‘चिया’ की खेती की, जिसने उनकी आर्थिक स्थिति की तस्वीर ही बदल दी है।

10 हजार की लागत में हुआ 1.50 लाख का मुनाफा

परंपरागत रूप से दशकों से केवल गेहूं उगाने वाले तीरथ उईके ने वर्ष 2025-26 के रबी सीजन में जोखिम उठाते हुए 2 एकड़ भूमि पर चिया की फसल लगाई थी। किसान तीरथ ने बताया कि इस फसल में उनकी मात्र 10 हजार रुपये की लागत आई, जबकि उन्हें करीब 1.50 लाख रुपये का शानदार मुनाफा प्राप्त हुआ। इस आर्थिक लाभ ने खेती के प्रति उनका उत्साह और विश्वास दोनों बढ़ा दिया। इसी परिणाम से प्रेरित होकर उन्होंने 2026 के खरीफ मौसम में भी लगभग 4 एकड़ क्षेत्र में चिया की बोवनी की है।

किसानों से की नई और लाभकारी फसलें अपनाने की अपील

श्री उईके ने बताया कि जिस खेत में वे पहले गेहूं लगाते थे, उसी खेत में चिया की खेती से उन्हें कहीं अधिक आर्थिक लाभ मिला है। उन्होंने कृषि विभाग और शासन का आभार जताते हुए कहा कि तकनीकी सलाह और सही मार्गदर्शन से किसानों को नए प्रयोग करने का हौसला मिलता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे बाजार की मांग को समझें और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ चिया जैसी लाभकारी फसलें अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं।

प्रशासनिक स्तर पर मिल रहा निरंतर प्रोत्साहन

किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें नवीन एवं लाभकारी फसलों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए आत्मा (किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग) द्वारा निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। जिला कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे के निर्देशन और कृषि उपसंचालक श्री अश्वनी झारिया के मार्गदर्शन में जिले के किसानों को चिया सहित अन्य औषधीय एवं लाभकारी फसलों के उत्पादन के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। किसान तीरथ की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर किसान सीमित संसाधनों में भी बेहतर आय के अवसर तलाश सकते हैं।


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