आत्मा की आराधना का महापर्व है पर्युषण पर्व
पिंडरई में चल रहा आर्यिका मां विमल मति माताजी के सानिध्य में दशलक्षण पर्व
मंडला महावीर न्यूज 29. आत्मा की आराधना का महापर्व है पर्युषण है, इसी पवित्र भावना के साथ पिंडरई नगर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी, 16 सितंबर से दिगंबर जैन समाज के दस दिवसीय पर्युषण महापर्व चल रहा है। इस वर्ष नगर के व्रतियों और श्रद्धालुओं को संत शिरोमणि आचार्य भगवंत श्री विद्यासागर महाराज एवं पूज्य आचार्य महाराज श्री समयसागर की आज्ञानुवर्ती शिष्या, परम वंदनीय आर्यिका मां विमल मति माता जी ससंघ का पावन मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ है।
पर्युषण पर्व के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया गया कि परी का अर्थ है चारों ओर से, और उषण का अर्थ है धर्म की आराधना। इन दस दिनों में आत्मा के विशुद्ध गुणों की विशेष आराधना की जाएगी। पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को परम वंदनीय आर्यिका मां की मंगल देशना के माध्यम से दशलक्षण धर्मों उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य धर्म का विस्तार से श्रवण करने का सौभाग्य मिलता है।
श्री विद्या स्वभाव भवन में हो रहा आयोजन
सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष चौधरी कैलाश चंद्र ने साधु सेवा समिति के सदस्य ऋषभ को जानकारी देते हुए बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान होने वाले समस्त धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन श्री विद्या स्वभाव भवन में आयोजित किए जा रहे है। धर्म-ध्यान और तपस्या के इन दस दिवसीय विशेष आयोजनों का भव्य समापन क्षमावाणी के पावन पर्व के साथ किया जाएगा, जहां सभी एक-दूसरे से जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा याचना कर मैत्री भाव का संदेश देंगे।










