मां नर्मदा उत्तरवाहिनी पंचकोषी परिक्रमा में उमड़े श्रृद्धालु

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पुरुषोत्तम मास के प्रथम दिन मां नर्मदा उत्तरवाहिनी पंचकोषी परिक्रमा में उमड़े श्रृद्धालु

  • ब्रह्म मुहूर्त में गूंजे माँ नर्मदा के जयकारे
  • 17.5 किमी की पैदल यात्रा कर भक्तों ने अर्जित किया पुण्य

मंडला महावीर न्यूज 29. हिंदू पंचांग के अनुसार अत्यंत पवित्र माने जाने वाले अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास का शुभारंभ रविवार 17 मई को हुआ। इस पावन अवसर पर महिष्मति नगरी मंडला में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महिष्मति मां नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा आयोजन समिति के तत्वावधान में प्रथम दिवस ही सैकड़ों श्रद्धालुओं ने माँ नर्मदा की उत्तरवाहिनी पंचकोषी परिक्रमा पूरी कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।बताया गया कि आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर यह पंचकोषी परिक्रमा ब्रह्म मुहूर्त में श्री व्यास नारायण मंदिर किलाघाट से शुरू हुई। श्रद्धालुओं ने नर्मदा के पावन जल का आचमन कर अपनी 17.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा प्रारंभ की। सुबह 5 बजे से शुरू हुई यह यात्रा दोपहर 12 बजे तक अनवरत चलती रही, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

परिक्रमा का मार्ग में है प्रमुख तीर्थ 

पंचकोषी परिक्रमा का अर्थ है पाँच कोष की यात्रा, जो लगभग 17.5 किलोमीटर होती है। यह यात्रा किलाघाट स्थित व्यास नारायण मंदिर से प्रारंभ होकर सरस्वती प्रस्त्रवण तीर्थ पुरवा पहुँचती है। यहाँ से तट परिवर्तन कर श्रद्धालु सहस्त्रधारा सुरंगदेवरी पहुँचते हैं और पुन: गौंझी से होते हुए वापस किलाघाट पर इसका समापन होता है। इस मार्ग में श्रद्धालुओं ने तीन प्रमुख तीर्थों और कई ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन किए, जिनमें श्री व्यास नारायण तीर्थ, सरस्वती प्रस्त्रवण तीर्थ और सहस्त्रवर्णी तीर्थ सहस्त्रधारा। त्रिवेणी संगम, हवन टेकरी से निकला घृतनाला, मंगलेश्वर मंदिर, दादा धनीराम जी की समाधि, गौ घाट, देवदरा और रिण मोचन कुंड है।

पुरुषोत्तम मास की महिमा 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने इस मास को स्वयं अपना नाम पुरुषोत्तम दिया है। हर तीन साल में आने वाले इस अतिरिक्त महीने में जप, तप, दान और व्रत करने से अन्य महीनों की तुलना में दस गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। यह मास आत्म-शुद्धि और पापों के नाश के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

श्रद्धालुओं के लिए सेवा व्यवस्था 

आयोजन समिति के आग्रह पर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों द्वारा परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए बाल भोग, फल, शीतल पेय और स्वागत की विशेष व्यवस्था की गई थी। सेवा भाव के इस संगम ने यात्रियों की थकान को दूर कर उनमें नई ऊर्जा का संचार किया।

15 जून तक चलेगा परिक्रमा का दौर 

समिति ने बताया कि श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार 17 मई से 15 जून तक पूरे पुरुषोत्तम मास के दौरान कभी भी इस पंचकोषी परिक्रमा को कर सकते हैं। पैदल यात्रा में सामान्यत: 4 से 5 घंटे का समय लगता है। समिति ने समस्त धर्मप्रेमियों से इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।


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