नर्मदा के सच्चे सफाईकर्मी हैं कछुए

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विश्व कछुआ दिवस

नर्मदा के सच्चे सफाईकर्मी हैं कछुए, इन्हें बचाना हमारा कर्तव्य

  • पर्यावरणविद् राजेश क्षत्री ने बच्चों और मछुआरों को किया जागरूक
  • जलीय जैव विविधता पर बढ़ते संकट पर जताई चिंता

मंडला महावीर न्यूज 29. विश्व कछुआ दिवस के अवसर पर नर्मदा तट पर बच्चों और स्थानीय मछुआरों के बीच जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरणविद् एवं वन्यजीव विशेषज्ञ राजेश क्षत्री ने कछुओं के महत्व और उनके अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को बताया कि कछुआ जल का सबसे बड़ा सफाईकर्मी है, जो पानी के सड़े-गले पदार्थों का भक्षण कर जल स्रोतों को प्राकृतिक रूप से स्वच्छ रखता है।

राजेश क्षत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में जलीय जैव विविधता सबसे खतरनाक स्थिति में है। प्रदूषण के कारण मछली, मेंढक और कछुए तेजी से लुप्त हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि मध्य प्रदेश की राजकीय मछली महाशीर भी अब विलुप्त होने की कगार पर है। कछुओं के तेजी से खत्म होने के पीछे अवैध रेत खनन, बढ़ता तापमान, तालाबों का सूखना, तस्करी, तंत्र-मंत्र और घरों में पालने का मानवीय शौक मुख्य कारण हैं। इसके साथ ही नदियों के किनारे फैला प्लास्टिक कचरा, जिसे कछुए भोजन समझकर खा लेते हैं, उनकी मौत का कारण बन रहा है।

नदी तटों पर खेती और रसायनों से उजड़ रहे प्राकृतिक आवास 

पर्यावरणविद् ने बताया कि कछुए नदियों के किनारे दलदली और रेतीले क्षेत्रों में अंडे देते हैं। लेकिन नदी तटों पर हो रही खेती, कीटनाशकों का प्रयोग और बढ़ता मानवीय दखल उनके अंडों को असुरक्षित कर रहा है। पानी में मिल रहा तेल और रासायनिक कचरा भी उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कछुए का मांस, अंडे, खोल और त्वचा के लिए शिकार करना या उन्हें पालतू जानवर के रूप में बेचना कानूनी तौर पर एक गंभीर अपराध है।

नर्मदा स्नान के समय ना करें साबुन, शैम्पू का उपयोग 

कछुए और खरगोश की कहानी के माध्यम से बच्चों को नैतिक शिक्षा दी जाती रही है, और पुराणों में भी कछुए को धरती के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। इसके बावजूद कार्यक्रम के दौरान कई बच्चों ने हैरत से कहा कि उन्होंने आज तक कछुआ देखा ही नहीं है। इस दौरान पर्यावरणविद् ने बच्चों से नर्मदा स्नान के समय पॉलिथीन, शैम्पू और साबुन का उपयोग न करने की अपील की।

मछुआरों ने लिया संरक्षण का संकल्प 

कार्यक्रम के अंत में राजेश क्षत्री ने स्थानीय मछुआरों से मुलाकात कर उनसे कछुओं का जीवन बचाने का आग्रह किया। सभी मछुआरों ने उनकी बात का समर्थन करते हुए सहमति दी कि यदि नदी में मछली पकड़ते समय जाल में कछुआ फंसता है, तो वे उसे तुरंत सुरक्षित पानी में छोड़ देंगे। उपस्थित सभी जनों ने नर्मदा के इन सच्चे साथियों की रक्षा करने और जलीय पर्यावरण को बचाने का सामूहिक संकल्प लिया।


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