पीने के पानी को तरस रहा सलवाह
विकास के दावों के बीच रेत के डंपर बुझा रहे ग्रामीणों की प्यास
- तपती गर्मी में बूंद-बूंद को मोहताज हुए ग्रामीण
- प्रशासनिक अनदेखी से फूटा जनता का आक्रोश
मंडला महावीर न्यूज 29. 21वीं सदी के आधुनिक भारत और विकास के ऊँचे दावों के बीच मंडला जिले के विकासखंड घुघरी के ग्राम सलवाह से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। यहाँ भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच ग्रामीण एक-एक बाल्टी पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए अब रेत लेकर गुजरने वाले डंपरों के भरोसे टिके हैं।
ग्राम सलवाह के ग्रामीणों ने व्यथा सुनाते हुए बताया कि गांव में जलस्तर गिरने और सरकारी नल-जल योजनाओं के ठप होने से पीने के पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी का आलम यह है कि ग्रामीण सड़क पर खड़े होकर गीली रेत लेकर निकलने वाले डंपरों को रोकते हैं। इन डंपरों की बॉडी से रिसने वाले गंदे पानी को ग्रामीण बर्तनों में जमा करते हैं और उसी से अपना गुजारा कर रहे हैं। यह दृश्य न केवल हृदयविदारक है, बल्कि प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है।
सीएम हेल्पलाइन और शिकायतें बेअसर
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक गुहार लगाई है, लेकिन समाधान के नाम पर अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। नेताओं और मंत्रियों के हर घर जल के वादे यहाँ की जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
क्या एक सभ्य समाज में बुनियादी जरूरत के लिए भी ग्रामीणों को डंपर चालकों की दया पर निर्भर रहना पड़ेगा? डंपरों के पीछे भागते बच्चे और महिलाएं यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी सुध लेने वाला कोई क्यों नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप कर पानी के टैंकरों या अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं का प्रबंध नहीं किया, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।










