मंडला के लघु उद्योगों का मुरीद हुआ महाराष्ट्र का दल
सीडीवीडी संस्था के जंगल फ्रेश मॉडल का किया अध्ययन
- बिना भारी मशीनरी के वनोपज से स्वरोजगार
- अमरावती के किसानों ने सीखा शहद प्रसंस्करण और लेंटाना शिल्प
मंडला महावीर न्यूज 29. स्थानीय वनोपज और सरल तकनीकी के माध्यम से ग्रामीण विकास को नई दिशा दे रही सेंटर ऑफ डिस्कवरी फॉर विलेज डेवलपमेंट संस्था के कार्यों का अवलोकन करने महाराष्ट्र से एक विशेष दल मंडला पहुँचा। अमरावती जिले के धारिणी से आए समाज प्रगति सहयोग संस्था के किसानों के इस भ्रमण दल का मुख्य उद्देश्य मंडला में वनोपज आधारित उत्पादों और उनके निर्माण की सहज तकनीकों का अध्ययन करना था।
सीडीवीडी के डायरेक्टर निशार कुरैशी ने दल को बताया कि कैसे बिना किसी भारी मशीनरी के, घरेलू सामान की सहायता से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर विक्रय किए जा सकते हैं। भ्रमण दल ने शहद प्रसंस्करण इकाई में जंगलों से शहद लाने, उसे फिल्टर करने और पैकेजिंग की बारीकियों को करीब से देखा। कार्यक्रम समन्वयक विजय कुमार ने कहा कि धारिणी और मंडला की भौगोलिक स्थिति एवं वनोपज में काफी समानताएं हैं, इसलिए यहाँ के सफल मॉडल को महाराष्ट्र में भी लागू किया जाएगा।
लेंटाना शिल्प और मार्केटिंग मॉडल की सराहना
संस्था के मास्टर ट्रेनर मिलन सिंह ने रामपुरी में चल रहे लेंटाना कार्यों का प्रदर्शन किया। दल ने लेंटाना से निर्मित सोफासेट, मंदिर, मचिया और बच्चों की कुर्सियों की कलात्मकता की जमकर सराहना की। इसके बाद दल ने अंजनिया स्थित वन धन केंद्र का भ्रमण किया, जहाँ केंद्र प्रभारी बालसिंह ठाकुर ने फूड प्रोसेसिंग की जानकारी दी।
मंडला विलेज मार्ट बना आकर्षण का केंद्र
मार्केटिंग से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए संस्था ने अपने जंगल फ्रेश ब्रांड की सफलता की कहानी साझा की। मंडला विलेज मार्ट की संचालिका भूमिका पटेल ने बताया कि किस तरह विभिन्न समूहों के उत्पादों को एक साझा मंच प्रदान कर विक्रय किया जा रहा है। महाराष्ट्र से आए डेलीगेट्स ने इस मार्केटिंग मॉडल को ग्रामीण आर्थिकी के लिए एक बेहतरीन विकल्प बताया। कार्यक्रम के अंत में निशार कुरैशी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में हरसंभव तकनीकी सहयोग का आश्वासन दिया।









