उदयपुर में बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण
महीने भर से नल-जल योजना ठप
- हैंडपंप और महंगे टैंकरों के भरोसे जनता
- जल जीवन मिशन में ठेकेदार की मनमानी
- पाइपलाइन बिछाने में तोड़ी पुरानी लाइन
- बेतरतीब खुदाई से बढ़ा हादसों का खतरा
मंडला महावीर न्यूज 29. गर्मी की दस्तक के साथ ही बीजाडांडी जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम उदयपुर में पेयजल संकट गहरा गया है। मार्च की शुरुआत से ही यहाँ पानी की किल्लत बढ़ गई है, लेकिन विडंबना यह है कि शासन या प्रशासन द्वारा अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। स्थिति यह है कि यहाँ की नल-जल योजना पिछले डेढ़ महीने से पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे ग्रामीण पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी शुरू होते ही नल-जल योजना के माध्यम से एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा था, वह भी मात्र 4 से 5 डिब्बा। लेकिन पिछले डेढ़ माह से हालात बदतर हो गए हैं। विशेषकर वार्ड नंबर 1 बैगा टोला, वार्ड नंबर 2, 3 (कॉलोनी) और वार्ड नंबर 8 व 9 में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद है। लोग प्यास बुझाने के लिए हैंडपंपों और निजी बोरवेल पर निर्भर हैं।
जल जीवन मिशन बना जी का जंजाल
क्षेत्र में जल जीवन मिशन के अंतर्गत नर्मदा नदी का जल पहुँचाने का कार्य पिछले 2 वर्षों से चल रहा है, लेकिन यह अब तक अधूरा है। वर्तमान में उदयपुर में नई पाइपलाइन के विस्तारीकरण का कार्य किया जा रहा है, जो ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। आरोप है कि ठेकेदार ने नई लाइन बिछाने के चक्कर में पुरानी चालू पाइपलाइन को जगह-जगह से क्षतिग्रस्त कर दिया है। विशेष रूप से तरवानी से टंकी भरने वाली लाइन डैमेज होने के कारण पानी की टंकी पूरी नहीं भर पा रही है, जिससे जलापूर्ति ठप है।
पैसा देकर पानी खरीदने को मजबूर ग्रामीण
पानी की भारी किल्लत के कारण ग्रामीणों को निजी टैंकरों और बोरवेल से पानी खरीदना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में पानी की खपत बढ़ गई है, लेकिन पंचायत इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार भी पिछले एक सप्ताह से कार्यस्थल से नदारद है और केवल इक्का-दुक्का मजदूर ही नजर आते हैं। घरों के सामने गहरे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है और हादसों का डर बना हुआ है।
पाईप लाईन कार्य में नियमों की कर रहे अनदेखी
पाइपलाइन बिछाने के कार्य में तकनीकी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक पाइपलाइन 1 मीटर की गहराई में डाली जानी चाहिए, लेकिन ठेकेदार कहीं 1 फीट तो कहीं 2 फीट की गहराई पर ही पाइप डाल रहा है। वॉटर लेवल का ध्यान न रखने के कारण ग्रामीणों को आशंका है कि लाइन डलने के बाद भी पानी टंकी तक नहीं पहुँच पाएगा। विभाग द्वारा इस कार्य की कोई मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है।
जिम्मेदारों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
जब इस संबंध में विभाग के उपयंत्री से बात की गई, तो उनका कहना था कि काम होगा तो टूट-फूट तो होगी ही। अधिकारियों का यह तर्क ग्रामीणों के गले नहीं उतर रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पाइपलाइन को दुरुस्त कर जलापूर्ति शुरू की जाए और घटिया निर्माण कार्य की जांच कर ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए।











