मंडला जिला अस्पताल में सांडों का दंगल
सुरक्षा व्यवस्था तार-तार, मरीजों और तीमारदारों में दहशत
- अस्पताल या अखाड़ा, सुरक्षा पर उठे सवाल
- मंडला जिला चिकित्सालय परिसर में आवारा मवेशियों का आतंक
मंडला महावीर न्यूज 29। जिला चिकित्सालय मंडला अपनी बदहाल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। अस्पताल परिसर इन दिनों आवारा मवेशियों और श्वानों (कुत्तों) का अड्डा बन चुका है, जिससे यहाँ आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की जान जोखिम में बनी रहती है। शुक्रवार को हुई एक घटना ने अस्पताल प्रबंधन के सुरक्षा दावों की पूरी तरह पोल खोल दी।
वाहन स्टैंड के पास भिड़े दो सांड
शुक्रवार को अस्पताल परिसर उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जब दो विशालकाय सांड आपस में भिड़ गए। यह भिड़ंत अस्पताल के वाहन स्टैंड के ठीक पास हुई। सांडों के बीच हो रही इस भयंकर लड़ाई से वहाँ अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद लोगों में भगदड़ की स्थिति बन गई। गनीमत रही कि वहां मौजूद लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए जैसे-तैसे सांडों को खदेड़ा, अन्यथा कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने कड़ा आक्रोश जताया है। लोगों का कहना है कि:
- बड़ी अनहोनी की आशंका: यदि लड़ाई के दौरान कोई मरीज या बुजुर्ग बीच में आ जाता, तो जानलेवा चोट लग सकती थी।
- वाहनों का नुकसान: स्टैंड पर खड़े दर्जनों वाहनों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहा।
- प्रबंधन की लापरवाही: अस्पताल परिसर में आवारा जानवरों का प्रवेश सुरक्षा कर्मियों की सक्रियता पर सवालिया निशान लगाता है।
सुरक्षा कर्मियों को हिदायत देने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जिला अस्पताल प्रबंधन नींद से जागे और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करे। लोगों का कहना है कि गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को सख्त हिदायत दी जानी चाहिए कि वे आवारा मवेशियों को परिसर के अंदर प्रवेश न करने दें। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
”अस्पताल में इलाज कराने आए लोग पहले ही अपनी परेशानियों से जूझ रहे होते हैं, ऐसे में सांडों और आवारा कुत्तों का आतंक उनकी मानसिक और शारीरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। प्रशासन को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।” — मुकेश कुमार, नागरिक










